(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 292

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श्री ओ.वी. अलगेसनः श्रीमती जी, मैं उसी बात पर आ रहा हूँ, धैर्य रखिये।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः आप पहले इस प्रश्न का उत्तर दीजिए।

श्री ओ.वी. अलगेसनः हाँ, मैं यथा समय अपने ढंग से इसका उत्तर दूंगा।

पंडित गोविंद मालवीयः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि हमें किस समय तक बैठना है?

कुछ माननीय सदस्यः 6.00 बजे तक।

कुछ माननीय सदस्यः 7.00 बजे तक।

माननीय उपाध्यक्षः मैं देख रहा हूँ कि सभा में सदस्यों की संख्या कम होती जा रही है और जब बहुत कम हो जायेगी, मैं खड़ा हो जाऊंगा।

सार्जेन्ट रोहिणी कुमार चौधरीः महोदय, हमें अब चाय पीने तक के लिये उठ जाना चाहिए।

माननीय उपाध्यायः नहीं, माननीय सदस्य अब शीघ्र समाप्त कर देंगे।

श्री ओ.वी. अलगेसनः महोदय, इस प्रकार के उपाय का दोहरा औचित्य हो सकता है। जनता से पुरजोर मांग आनी चाहिए कि इस प्रकार का उपाय किया जाए अथवा कुछ लोग जो इस सुधारात्मक उपाय के समर्थक हैं और सोचते हैं कि यह व्यवस्था पूरे समाज के लिये लाभप्रद है जबकि हो सकता है जनता इसके लिए तैयार न हो। तब उन्हें, जो सोचते हैं कि इस तरह के उपाय पूरे समाज के लिए लाभकारी हैं। जनता के पास जाना चाहिए और अपने दृष्टिकोण का आधार स्पष्ट करना चाहिए। मेरा केवल इतना अनुरोध है कि जो लोग इस उपाय को लाने के लिये जिम्मेदार हैं और जो सोचते हैं कि यह हिंदू समाज के लिये लाभप्रद होना चाहिए। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि उन्होंने हाल ही में संविधान और इसके अनेक प्रावधान पारित किए हैं और आप जानते हैं इसके विभिन्न उपबंधों के साथ अनेक परन्तुक और अपवाद जुड़े हुए हैं, क्या उस कारण हम अपवादों को मुख्य अनुच्छेदों में रखेंगे? यदि विधेयक का समर्थन करने वालों के तर्कों पर विचार करें, तो ऐसा प्रतीत होता है कि हमें अपवादों को मुख्य विधि में रखना होगा।

महोदय, फिर यह विधेयक जिसके बारे में हमारी बहनें उत्सुकता दिखा रही हैंख्...,

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः भाई भी।

श्री ओ.वी. अलगेसनः मेरे विचार में इस विधेयक में ऐसी कोई बात नहीं। एकपत्नीक व्यवस्था की सभी ने प्रशंसा की है। यह ऐसी कोई नई संस्था नहीं है। हमारे देश में एकपत्नीक व्यवस्था चिरकाल से चली आ रही है, परन्तु क्या विवाह-विच्छेद की भी कोई व्यवस्था थी? जैसे ही पुरुषों को कानून के दायरे में एक पत्नीक व्यवस्था के अन्तर्गत लाया