280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं और विस्तार नहीं करना चाहता, परन्तु अन्त में यह कह कर समाप्त करना चाहता हूँ कि मूल व्यक्ति, जिसको संहिता की बात सूझी (यद्यपि एक सज्जन पुरुष, जिनको कल तक सहमत नहीं किया जा सका) श्री वी.एन. राउ को हम यह मानते हैं, इस विधेयक की बहुत चिन्ता है। वह चाहेंगे कि उनके सभी प्रस्ताव, भले ही कुछ परिवर्तित रूप में, शीघ्र से शीघ्र क्रियान्वित हो। अतः मैं उनकी राय भी जानना चाहता हूँ, जो हिंदू विधि समिति की भी राय रही है।
श्रीमती जी. दुर्गाबाईः वह अकेले नहीं थे, उन प्रस्तावों पर विचार करने के लिए प्रवर समिति थी।
श्री ओ.वी. अलगेसनः हिंदू विधि समिति ने निम्न बात कही थीःµ
फ्यथासम्भव सहमति से समाधान करने का उद्देश्य होना चाहिए और वाद-विवाद में तीक्ष्णता नहीं आनी चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं कि सुधार की गति धीमी हो जाये, क्योंकि सच्चा सुधार सहमति से ही किया जा सकता है, विवश करके नहीं।य्
महोदय, मेरी बात पूरी हो गयी है।
तत्पश्चात् सभा गुरुवार, 15 दिसम्बर, 1949 के 10.45 बजे तक के लिये स्थगित कर दी गई।