284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मामला दोबारा विचारार्थ आये, जैसे मैं आशा करता हूँ, अगले सत्र में, तब इस सभा में और बाहर से बड़ी संख्या में लोगों का इस विधेयक के प्रति समर्थन प्राप्त हो।
ऽमाननीय श्री सत्यनारायण सिन्हा (संसदीय कार्य राज्य मंत्री)ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः-
फ्कि प्रस्ताव को मतदान के लिये रखा जाये।य्
श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगालः मुस्लिम)ः क्या मैं एक स्पष्टीकरण के लिये पूछ सकता हूँ?
माननीय अध्यक्षः मेरे विचार में अब हमें और समय नहीं लेना चाहिए, विशेष कर तब, जब सभा के नेता ने बहुत ही स्पष्ट वक्तव्य दे दिया है। मैं माननीय सदस्यों को स्मरण दिलाना चाहता हूँ कि विचार के इस चरण पर पूरे 9 दिन तक चर्चा हुई है और आज 10वां दिन है। 33 वक्ताओं ने इस चर्चा में भाग लिया है और हमने 30 घंटे और 28 मिनट का समय इसमें लगाया है। मेरे विचार में काफी समय दिया गया है और...
एक माननीय सदस्यः क्या मैं जान सकता हूँ...
माननीय अध्यक्षः जब मैं बहस को विराम देने को स्वीकार करता हूँ, तो मैं उसके कारण बताने के लिए बाध्य नहीं हूँ। परन्तु मैं जो महसूस करता हूँ, उसको स्पष्ट कर देना चाहता हूँ। मैं माननीय प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में दिये गये वक्तव्य से सहमत हूँ कि इसके सभा के भीतर और बाहरµसब को विधेयक के विभिन्न उपबंधों के बारे में अपनी राय बताने का पूरा अवसर मिलेगा। विद्यमान चरण आम चर्चा का चरण है और हम किसी मद विशेष के खंड विशेष पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। यह सम्भव है कि ब्यौरे के बारे में लोगों की राय भिन्न-भिन्न हो और जहां तक विधेयक की सामान्यता का सम्बन्ध है, काफी हद तक सहमति हो सकती है। यदि हम इसी अवस्था में चर्चा को जारी रखते हैं, मुझे आशंका है कि हमारी चर्चा अत्यन्त अस्पष्ट असामान्य और असम्बद्ध होगी_ सम्भवतः उसमें अनेक बातों की आवृत्ति भी होगी। अतः इसका महत्वपूर्ण चरण विधेयक पर खंडवार विचार का होना और वह अवस्था आने से पूर्व माननीय सदस्यों को सरकार के साथ और सभा के बाहर अन्य लोगों के साथ सभी पहलुओं पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिलेगा। इसलिये मेरे विचार में विधेयक पर आगे चर्चा करना समय बर्बाद करने के बराबर होगा। इसलिये मैं बहस को विराम देने को स्वीकार करना चाहता हूँ और उसके बाद मैं विधि मंत्री को बोलने के लिये आमंत्रित करूंगा।
श्री रोहिणी कुमार चौधरी (असमः सामान्य)ः मैं एक वक्तव्य देना चाहता हूँ।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य क्या वक्तव्य देना चाहते हैं? यदि मैं आपको
ऽसी.ए. (विधि) डी, खंड 7, भाग II, 19 दिसम्बर, 1949, पृष्ठ 785-87