(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 300

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वक्तव्य देने की अनुमति देता हूँ तो प्रत्येक व्यक्ति को अपना वक्तव्य देने का अधिकार मिल जायेगा। आप कृपया बैठ जाइए।

श्री महावीर त्यागी (उत्तर प्रदेशः सामान्य)ः महोदय मैं आपसे एक स्पष्टीकरण चाहता हूँ कि क्या, इस अवस्था में प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद इसका अर्थ यह होगा कि विधेयक के सभी खंडों के सिद्धांतों के प्रति सभा प्रतिबद्ध मानी जायेगी?

माननीय अध्यक्षः मैं स्थिति को और स्पष्ट करता हूँ। वास्तव में जब सभा ने प्रस्ताव को प्रवर समिति को भेजने की स्वीकृति दी थी, तभी सभा ने विधेयक के सिद्धांत को स्वीकार कर लिया था। अब इस प्रकार के विधेयक में इस बात का निर्णय करना बहुत कठिन है कि सिद्धांत क्या है, क्योंकि प्रत्येक खंड को सिद्धांत का रूप दिया जा सकता है। मैं स्थिति को स्पष्ट करता हूँ। इस विधेयक के उपबंधों की संख्या को देखते हुए इसका व्यापक स्वरूप स्पष्ट है कि सभा द्वारा एक ही सिद्धांत स्वीकार किया गया है कि हिंदू विधान को संहिताबद्ध करना वांछनीय है और विधेयक के प्रत्येक उपबंध पर चर्चा की जा सकती है, उसमें फेरबदल, परिवर्तन तथा उस प्रकार की सब बातें की जा सकती हैं।

श्री महावीर त्यागीः महोदय, फिर हमको कोई आपत्ति नहीं है।

श्री रोहिणी कुमार चौधरीः मैं इस विधेयक के सम्बन्ध में सभा को एक सुझाव देना चाहता हूँ। बहस को विराम देने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाये और स्वीकार कर लिया जाये। मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है। मैं इस विषय पर आगे चर्चा भी नहीं चाहता। वास्तव में समझौते का वातावरण बनाने के लिए मैंने स्वयं इसके विरोध में कुछ नहीं बोला। मेरा सुझाव यह है कि इस प्रस्ताव को अभी मतदान के लिए न रखा जाये। हम इस सभा के बाहर इस विधेयक का विरोध करने वालों को राजी करना चाहते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री की घोषणा से व्यावहारिक लाभ हुआ है।

माननीय अध्यक्षः मेरे विचार में प्रक्रिया के सम्बन्ध में सभा के माननीय नेता द्वारा दिये गये वक्तव्य के बाद और मैंने जो स्पष्ट किया है कि क्या बाध्यकारी है और क्या नहीं, अब इस विचारार्थ प्रस्ताव के पारित हो जाने के प्रस्ताव के बारे में कोई संदेह नहीं रह जाता। वास्तव में यह वांछनीय नहीं है कि इस बात को अब खुला रखा जाये ताकि जब इस पर पुनः विचार आरम्भ हो तो और चर्चा की जाये और भाषणों को प्रोत्साहन मिले इसलिये मैं प्रस्ताव को सभा के मतदान के लिये रखता हूँ।

डॉ. पी.एस. देशमुख (सी.पी. एवं बिरारः सामान्य)ः महोदय, मेरा एक व्यवस्था का प्रश्न है। हम सब ने माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिये गये सुझाव को सुना है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभा उसको स्वीकार कर लेगी। मेरा व्यवस्था का प्रश्न यह है कि सभा के समक्ष जो प्रश्न है वह विचारार्थ प्रस्ताव है। अब दिये गये सुझाव का वास्तविक अर्थ यह है कि विधेयक को वापस प्रवर समिति को भेज दिया जाये।