286 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कुछ माननीय सदस्यः नहीं, नहीं।
डॉ. पी.एस. देशमुखः महोदय, मैं स्पष्ट करता हूँ कि ऐसा करना संसदीय प्रक्रिया की अवहेलना करना है। सही प्रक्रिया यही होगी कि इसे प्रवर समिति, उसी समिति को या उससे बड़ी समिति को विधेयक भेजा जाये। उपर्युक्त सुझाव संसदीय प्रक्रिया के विरुद्ध है और उसको स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। यदि वह सुझाव सभा को स्वीकार्य है तो मुझे उस पर जरा सी भी आपत्ति नही है। परन्तु नियमित प्रक्रिया यही है कि विधेयक को उसी प्रवर समिति के पास भेजा जाये या उससे बड़ी प्रवर समिति के पास भेजा जाये।
माननीय अध्यक्षः प्रक्रिया की दृष्टि से मैं माननीय सदस्य की आपत्ति को समझता हूँ, परन्तु सभा के माननीय नेता ने सभा में किसी प्रस्ताव को अग्रेतर विचार के लिये नहीं रखा है। उन्होंने केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया है कि सरकार किस प्रकार कार्य करेगी और विधेयक के खंडों पर विचार के समक्ष क्या दृष्टिकोण अपनायेगी? उन्होंने इस सभा की किसी औपचारिक समिति को भेजने का कोई हवाला नहीं दिया। यदि ऐसा कोई प्रस्ताव रखा होता है, तो मैं निःसंदेह व्यवस्था के, इस प्रश्न को स्वीकार कर लेता। इस समय सभा के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। मेरे विचार में यह संसदीय प्रक्रिया के विरुद्ध भी नहीं है। बल्कि यदि साधारण प्रक्रिया से कुछ हट कर भी है, तो मेरी राय में, समझौते और तादात्म्य की भावना से हमें नयी प्रक्रिया भी बना लेनी चाहिए। अब मैं प्रस्ताव को मतदान के लिये रखता हूँ।
प्रश्न यह हैःµ
फ्कि इस प्रस्ताव को सभा के मतदान के लिये रखा जाए।य्
प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ
ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः महोदय, कुल मिलाकर सभा के समक्ष तीन प्रस्ताव हैं। उनमें से दो के प्रर्वतक श्री नजीरुद्दीन अहमद हैं। उनमें से एक विधेयक को प्रवर समिति को विचार करने के लिये अग्रेषित करने के बारे में है। दूसरे प्रस्ताव में विधेयक को जनमत हासिल करने के लिये परिचालित करने का सुझाव दिया गया है। इनके अतिरिक्त सभा के समक्ष मेरा प्रस्ताव है जिस में प्रवर समिति के प्रतिवेदन पर विचार करने का सुझाव दिया गया है। मैं श्री नजीरुद्दीन अहमद द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के बारे में कुछ शब्द कहना चाहता हूँ। नौ दिन तक चली चर्चा के दौरान मैंने एक बात महसूस की कि विधेयक का विरोध करने वाले सदस्यों का भी, उनको समर्थन प्राप्त नहीं था। तैंतीस सदस्यों में से अधिक से अधिक दो ने, जिन्होंने इस पर चर्चा में भाग लिया है, उनके प्रस्ताव का पक्ष लिया है। शेष ने उनका समर्थन बिल्कुल नहीं किया। दूसरे, उनके
ऽसी.ए. (विधि) डी., खंड 7, भाग II, 19 दिसम्बर, 1949, पृष्ठ 787-92