(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 302

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भाषण को जो 6 घंटे से अधिक समय तक चला, जिन लोगों ने समझा है, उनको स्पष्ट हो गया है कि इस बात के होते हुए भी कि उनके भाषण के दौरान उनसे अनेक बार पूछा गया कि कि इस विधेयक को प्रवर समिति को क्यों भेजा जाये या जनमत के लिये क्यों परिचलित किया जाये, मेरे निष्कर्ष के अनुसार वे अपने प्रस्तावों के समर्थन में कोई ठोस कारण प्रस्तुत करने में सफल नहीं हुए। इसलिये मैं इन दो प्रस्तावों के बारे में कुछ कहना अनावश्यक रूप से अपना और सभा का समय बर्बाद करना समझता हूँ।

महोदय, अब मैं अपने प्रस्ताव की बात करता हूँ। जैसा कि आपने कहा कि कुल मिला कर तैंतीस वक्ताओं ने इस चर्चा में भाग लिया है। मैं सभा को इस प्रस्ताव को कितना समर्थन प्राप्त हुआ, यह बताना चाहता हूँ और यह भी बताना चाहता हूँ कि सभा के सदस्यों ने किस हद तक उसका विरोध किया है। तैंतीय सदस्यों, जिन्होंने इस वाद-विवाद में भाग लिया है, में से लगभग 23 सदस्य इस प्रस्ताव के पक्ष में बोले हैं। इन 23 सदस्यों में से केवल दो सदस्य ऐसे थे जिन्होंने इस विधेयक को सशर्त समर्थन देने की बात कही है। तीन सदस्य तटस्थ रहे_ तीन परिचालन के पक्ष में थे और चार विधेयक पर विचार को स्थगित करने के पक्ष में थे। इस प्रकार यह बिल्कुल स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में सदस्य इस विधेयक के पक्ष में हैं, जैसा कि मैंन कहाµ23 सदस्य से अधिक।

श्री रोहिणी कुमार चौधरीः क्या उनको इस बात की जानकारी है कि उन व्यक्तियों ने, जो विधेयक का विरोध करना चाहते थे, जिनके नाम दिये गये थे, परन्तु उनको बोलने का अवसर नहीं मिला।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं केवल उनके भाषणों का विश्लेषण कर रहा हूँ, जो बोले थे।

माननीय अध्यक्षः शांति। शांति।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस विषय पर आगे विचार करते हुए और इस बात का पता लगाने के लिये कि इस विधेयक का किस प्रकार विरोध किया गया है और यह भी पता चल सके कि विधेयक के किस भाग की आलोचना की गयी है, मैंने पाया कि यह विधेयक जिस में हिंदू विधान को संहिताबद्ध करने की व्यवस्था की गयी है, उसमें 8 मामले शामिल हैं, उनमें से पांच मामलों के सम्बन्ध में बिल्कुल कोई विरोध नहीं किया गया।

श्री रोहिणी कुमार चौधरीः क्योंकि आपने हमें बोलने का अवसर ही नहीं दिया।

माननीय अध्यक्षः शांति शांति।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं आशा करता हूँ कि मेरे मित्र व्यवधान नहीं डालेंगे।