(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 310

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श्री जे.आर. कपूर (उत्तर प्रदेश)ः परन्तु जो सदस्य विधेयक में बहुत रुचि ले रहे हैं, उनकी शिकायत हो सकती है। श्रीमती रेणुका रे उपस्थित नहीं हैं और बहुत-से अन्य सदस्य भी हैं, जो इस पर बोलने के इच्छुक हैं।

माननीय अध्यक्षः मैं यह विचार कर रहा हूँ कि विभिन्न संशोधनों या स्थगत प्रस्तावों का चाहे जो भी परिणाम निकले, परन्तु जिन सदस्यों ने उन्हें भेजा है और वे अपनी सीटों पर नहीं हैं, और चूंकि अब अप्रत्यशित ढंग से इस पर विचार किया जाने लगा है, तो क्या ऐसी स्थिति में हमारे लिये उनको बुलाना उचित होगा। मुझे इसी बात की चिन्ता है। श्री रोहिणी कुमार चौधरी उपस्थित हैं। श्री नजीरुद्दीन भी यहां पर मौजूद हैं।

श्री आर.के. चौधरी (असम)ः मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप हमें आधे घण्टे का समय दें, ताकि अन्य सदस्य भी उपस्थित हो जायें।

माननीय अध्यक्षः चलो, आरम्भ करते हैं, मैं श्री नजीरुद्दीन अहमद को बुलाऊंगा।

पंडित कुंजरू (उत्तर प्रदेश)ः मेरा सुझाव यह है कि विधि मंत्री, जिन्होंने भिन्न-भिन्न वर्गों के साथ बातचीत की है, के वक्तव्य के द्वारा इस पर चर्चा आरंभ की जानी चाहिए। उन्होंने सम्मेलन में हुई चर्चा की संक्षिप्त रिपोर्ट भी परिचालित की है। परन्तु मेरा विचार है कि सभा के सभी सदस्य उनसे पूरी बात और उनके द्वारा प्रस्तावित संशोधन का संक्षिप्त ब्यौरा सुनना पसंद करेंगे। मेरे विचार मैं यह रास्ता ज्यादा बेहतर होगा और इससे सदस्यों को समय भी मिल जायेगा।

डॉ. अम्बेडकरः मेरे पास कहने को और कुछ नहीं है। मैंने एक वक्तव्य ध्यानपूर्वक तैयार किया था ताकि वह सत्र के आरम्भ में ही सदस्यों में परिचालित कर दिया जाये, जिससे सदस्यों को पूरी जानकारी मिल सके कि क्या-क्या बातें हुईं। बल्कि मुझे इस बात का खेद है कि हम सम्मेलन की कार्यवाही का शब्दशः रिकार्ड नहीं रख सके, क्योंकि अनेक सदस्य भिन्न-भिन्न भाषाओं में बोले थे। कुछ सदस्य हिंदी में बोले, कुछ अंग्रेजी में, कुछ गुजराती, कुछ मराठी और कुछ संस्कृत में भी बोले थे। इसलिये शब्दशः रिकार्ड रखना, बिल्कुल असम्भव था और मेरे विचार में कुछ तमिल में भी बोले थे। इसलिये यह बिल्कुल असम्भव था कि किसी आशुलिपिक को कहते कि वह कार्यवाही को शब्दशः रिकार्ड करे। अन्यथा, यदि मैं ऐसा कर सकता तो मुझे बहुत प्रसन्नता होगी। परिणामस्वरूप, मैंने स्वयं अपनी स्मरणशक्ति के अनुसार संक्षिप्त रूप से कुछ मुद्दे चर्चा के लिये सम्मेलन में प्रस्तुत किये थे। मैंने ये मुद्दे इस सभा में हुई चर्चा के आधार पर तैयार किये थे जिनमें सभा में प्रस्तुत भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण सम्मिलित थे। वे सम्मेलन में रखे गये थे। और उन पर बोलने के लिये सम्मेलन में किन मुद्दों पर अधिकांश वक्ताओं की सहमति थी और उसी के अनुसार मैंने मूल विधेयक में कुछ संशोधनों का सुझाव दिया है।