(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 311

296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

महोदय, आपको स्मरण होगा कि मैंने सभा की सहायता के लिये हिंदू संहिता के दो पाठ तैयार किये थे। एक में क्रमानुसार मूल धारा और नये संशोधनों का उल्लेख है, जिनको मैंने उसमें सम्मिलित करने का प्रस्ताव किया है ताकि उनको पूरा ब्यौरा मिल सके। मैंने एक अन्य तथ्य पुस्तिका भी तैयार की है, जिसमें दायीं ओर प्रवर समिति के भाग का मूल पाठ दिया गया है और बायीं ओर संशोधनों संहित नयी संहिता का पाठ है, ताकि जब कभी संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत हो, सदस्यों को पहले खंड के साथ-साथ नये खंड को भी पढ़ने का अवसर मिले ओर वे उनके अन्तर को समझ सकें। मेरा विचार है कि मैंने भरसक प्रयत्न किया है कि सभा के सदस्य अनौपचारिक समिति में चर्चा के परिणामस्वरूप परिवर्तित रूप में हिंदू संहिता के उपबंधों को ठीक से समझ सकें। यदि किसी माननीय सदस्य को कोई प्रश्न पूछना हो तो मैं विवरण में दी गयी जानकारी के अतिरिक्त जो भी सम्भव होगा बताऊंगा।

श्री ज्ञानी राम (बिहार)ः माननीय विधि मंत्री ने बताया है कि इस विधेयक पर या दो दिन तक चर्चा होगी, फिर यह स्थगित हो जायेगा।

माननीय अध्यक्षः पार्टी की बैठक में हुई चर्चा से हमारा कोई सम्बन्ध नहीं है।

श्री आर.के. चौधरीः क्या पार्टी की बैठक में हुई बातचीत के सम्बन्ध में मंत्री महोदय एक वक्तव्य देंगे।

माननीय अध्यक्षः शांति! शांति। पार्टी की बैठक में हुई कार्यवाही पर यहां चर्चा नहीं की जा सकती।

श्री शिवन पिल्ले (ट्रावनकोर-कोचीन)ः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि क्या अब

खंडवार चर्चा होगी और विधेयक के सिद्धांतों पर आम चर्चा समाप्त हो गयी है?

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य ने सम्भवतः विधेयक की प्रगति पर ध्यान नहीं दिया। विचारार्थ प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है और अब विधेयक पर खंडवार चर्चा करना शेष है। मैं खंड 2 को सभा के मतदान के लिये रखूंगा परन्तु उससे पूर्व कुछ संशोधन हैं, अथवा चर्चा स्थगित करने के लिये, कुछ प्रस्ताव भेजे गये हैं। वह क्योंकि स्थगित प्रस्ताव हैं, इसलिये उनको पहले लेना होगा और लिये मैं श्री नजीरुद्दीन को बुला रहा हूँ कि यदि वह चाहे तो वह अपना प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री और विदेशी मंत्री (श्री जवाहर लाल नेहरू)ः एक माननीय सदस्य ने मुझसे कोई प्रश्न पूछा था और सभा के लिये यह उचित ही होगा कि मैं उसका उत्तर दे दूँ, यद्यपि आपने उसको अनावश्यक करार दिया था। यह विधेयक इस प्रकार का है कि यदि हम इस पर खंडवार चर्चा करते हैं तो सामान्य तौर पर सभा का इसमें काफी समय लगेगा। यह विवादास्पद मामला है जिसमें लोगों की राय भिन्न-भिन्न है। फिर भी सरकार इसको बहुत महत्व देती है और चाहती है अब इस पर चर्चा की जाये। परन्तु हम महसूस करते