297
हैं कि परिस्थितियां कुछ ऐसी हैं कि चाहे हम प्रतिदिन इस पर चर्चा करते रहें, तो भी इस सत्र में इसको पारित करवाना संभव नहीं होगा। इसलिये सरकार का विचार है, बशर्ते कि आप इसका अनुमोदन करें तो हम आरंभिक अवस्था में उठाई गयी आपत्तियों का निपटान कर लें। एक ओर या दूसरी ओर, ताकि रास्ता साफ हो जाए। अन्यथा सत्र के दौरान इस पर सभा का और समय खर्च न करें।
माननीय अध्यक्षः क्या मैंने स्थिति को ठीक से समझा है कि संशोधन अथवा प्रस्तावों को और काम स्थगित करके, पहले निपटाया जाना चाहिए और उसके बाद खंडवार चर्चा आरम्भ की जानी चाहिए।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री (श्री सत्य नारायण सिन्हा)ः जी, हाँ, यही बात है।
माननीय अध्यक्षः अब इस बात को ध्यान में रखते हुए क्या स्थगन प्रस्ताव किया जाना आवश्यक है?
श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल)ः नहीं।
माननीय अध्यक्षः यह बिना कोई भाषण दिये उसको औपचारिक रूप में प्रस्तुत कर दें जिससे हम अन्य कार्य कर सकें।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं प्रस्ताव करता हूँ फ्कि हिंदू संहिता विधेयक पर चर्चा को इस प्रयोजन के लिये बुलाये जाने वाले संसद के विशेष सत्र के लिये स्थगित कर दिया जाये, जिससे सदस्य, विधेयक पर तथा उससे सम्बन्धित अनेक सरकारी संशोधनों पर सम्पूर्ण तरीके से विचार कर सकें।य्
मैं अन्य विकल्प प्रस्तुत नहीं करना चाहता।
माननीय अध्यक्षः क्या वह अनिवार्य रूप से विशेष सत्र ही चाहते हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं अपने कुछ विचार सभा के समक्ष रखना चाहता हूँ और शेष मामला सरकार पर छोड़ देना चाहता हूँ। इसका विरोध या बाधा डालने से कोई सम्बन्ध नहीं है।
माननीय अध्यक्षः मेरा अभिप्राय यह है कि प्रस्ताव का क्या रूप होना चाहिए। क्या वह अगले सत्र तक स्थगित करना चाहते हैं। इतनी-सी बात है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः उस स्थिति में, मैं आपकी अनुमति से विकल्प भी प्रस्तुत करना चाहूंगा। मैं प्रस्ताव करता हूँःµ
फ्कि हिंदू संहिता विधेयक पर चर्चा को आगामी बजट सत्र के दौरान किसी तारीख तक के लिये स्थगित किया जाये।य्