298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और
फ्कि हिंदू संहिता विधेयक पर चर्चा को बजट सत्र समाप्त होने के बाद किसी तारीख तक के लिये स्थगित किया जाये।य्
मैं इस बात को पूरी तरह सरकार पर छोड़ता हूँ कि प्रस्ताव किस रूप में लिया जाये। माननीय प्रधानमंत्री ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है कि हम कुछ आपत्तियों पर विचार कर लें और बाद में किसी उपयुक्त समय पर खंडवार चर्चा आरम्भ कर लेंगे। इस विचार से मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ। इस सम्बन्ध में विचार करना और उपयुक्त तिथि निर्धारित करना सरकार का काम है।
निःसंदेह हमने विधेयक के सिद्धांतों को तकनीकी रूप में स्वीकार किया था, परन्तु एक समझौते के साथ ऐसा किया था, यद्यपि कार्रवाई वृतान्त में इस बात को सम्मिलित नहीं किया गया। माननीय विधि मंत्री ने वचन दिया था कि वह हिंदू विधान की जानकारी रखने वाले जन प्रतिनिधियों से राय लेंगे और विधेयक में संशोधनों का सुझाव देंगे। जैसा कि मैंने पहले अनुरोध किया था, यद्यपि प्रथम पाठ पारित हो गया है, परन्तु इसके साथ शर्त रखी गई थी कि सरकार उपयुक्त संशोधन सूत्रों का पता लगायेगी और सभा के सामने रखेगी और वे सूत्र दोनों पक्षों को स्वीकार्य होंगे। फिर भी मैंने देखा है कि माननीय विधि मंत्री ने बहुत महत्वपूर्ण और बड़ी संख्या में संशोधन सभा-पटल पर रखे हैं। मैंने यह भी देखा है कि सदस्यों ने भी बड़ी संख्या में संशोधन सभा-पटल पर रखे हैं। पहले से ही 17 सूचियां इकट्ठी हो गयी हैं और समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टस से पता चलता है कि सरकार ने खंडवार चर्चा के लिये एक अन्य अन्तिम सत्र बुलाने का निर्णय किया है। इस बात की कल्पना करने के ठोस कारण मौजूद हैं कि यदि यही हाल रहा तो बहुत से और संशोधन आयेंगे और इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
मैं कहना चाहता हूँ कि ये मामले बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। खंडवार चर्चा के दौरान हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि सभा में विस्तृत मामले को लेकर काफी मतभेद हैं। इन परिस्थितियों में अच्छी बात यह होगी कि सरकार संशोधनों पर विचार करने के लिए सभा को काफी समय दे और समझौते के मुद्दों पर पहुंचे। माननीय विधि मंत्री ने बताया है कि उन्होंने अनेक लोगों के साथ परामर्श किया है परन्तु उन्होंने, जहां तक मुझे जानकारी है, सभा के विभिन्न समूहों जो विधेयक के सिद्धांतों के विरुद्ध है, के साथ विचार-विमर्श नहीं किया है। अनेक सदस्यों ने प्रथम वाचन के समय विरोध किया था, पर उसके साथ परामर्श नहीं किया गया है।
श्री त्यागीः उनमें सब हिंदू नहीं हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः उनमें से कम से कम एक सदस्य हिंदू नहीं है और वह मैं हूँ। बात यह है कि इन सभी मामलों पर सभा में उपयुक्त तरीके से न चर्चा की जा