(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 316

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माननीय अध्यक्षः मैं नहीं समझता कि ऐसा करना आवश्यक है। अच्छा यदि मैं यह कहूँ कि मामले को स्थगित किया जाता है और हम अगले कार्य पर विचार करें।

डॉ. अम्बेडकरः क्या मैं सुझाव दूं कि मेरे विचार में यह बहुत अच्छा होगा, यदि आप श्री नजीरुद्दीन अहमद के प्रस्ताव को निपटाने के बाद...

श्री नजीरुद्दीन अहमदः आप मुझे ही निपटा दें।

डॉ. अम्बेडकरः यदि आप इसको निपटाने के बाद इतना कह दें कि खंड 2 विधेयक का अंग बना, तो मैं स्वयं प्रस्ताव करूंगा कि विधेयक पर आगे विचार किया जाना, अब स्थगित कर दिया जाये। मैं हिंदू संहिता विधेयक को सरकारी कार्य-सूची की अन्तिम मद बनाने को तैयार हूँ।

श्री आर.के. चौधरीः मैंने एक संशोधन रखा था यद्यपि मैं बता नहीं सकता कि उसकी शब्दावली क्या है क्योंकि मेरे पास इस समय कागजात नहीं हैं। मैं इस विषय पर तैयार नहीं था। परन्तु जहां तक मुझे याद है मेरा प्रस्ताव यह था कि हिंदू संहिता विधेयक पर विचार के लिए विशेष सत्र बुलाया जाये। मेरी शिकायत इतने व्यस्त सत्र में इस प्रकार की चर्चा लाये जाने के विरुद्ध है कि व्यस्तता के कारण हम इस विषय पर अध्ययन करने के लिए समुचित समय नहीं निकाल पा रहे। इसलिये मैं चाहता हूं कि इस विषय पर विचार करने के लिये विशेष सत्र बुलाया जाये।

श्री एम.ए. आयंगर (मद्रास)ः आखिरकार श्री नजीरुद्दीन अहमद के प्रस्ताव में इतना ही तो कहा गया है कि सदस्यों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। और प्रधानमंत्री भी इस बात पर सहमत हैं। इसलिये मैं नजीरुद्दीन अहमद से अपने प्रस्ताव पर जोर न देने का अनुरोध करूंगा। अब प्रधानमंत्री के आश्वासन को देखते हुए इसको आगामी सत्र के किसी दिन तब के लिये स्थगित कर दिया जाये। आगामी सत्र के दौरान तिथि निश्चित करना या उसके तुरन्त बाद विशेष सत्र बुलाना सरकार का काम है। अब चूंकि हम सब इस बात पर सहमत हो गये हैं कि इस विधेयक पर खंडवार चर्चा अभी आरम्भ नहीं करनी है, तो मेरे विचार में दोनों पक्ष इससे संतुष्ट हैं। इसलिए प्रधानमंत्री के वक्तव्य को स्वीकार कर लिया जाये और श्री नजीरुद्दीन को अपने संशोधन पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है। इसलिये, इसको आगामी सत्र के किसी दिन तक के लिये स्थगित कर दिया जाये और इसका अर्थ यह होगा कि प्रधानमंत्री या सरकार कोई ऐसी तिथि निश्चित कर देंगे जो उपयुक्त और सुविधाजनक होगी।

डॉ. अम्बेडकरः क्या मैं पुनः हस्तक्षेप कर सकता हूँ? सभा में जो चर्चा हो चुकी है, मैं इसको दोहराना नहीं चाहता। हर बार जब यह विधेयक आता है, कुछ माननीय सदस्य विलम्ब करने वाला कोई प्रस्ताव रख देते हैं। अब यह बात समाप्त होनी चाहिए। हम ऐसी स्थिति में पहुंच गये हैं जब विधेयक पर खंडवार चर्चा आरम्भ की जानी चाहिए और इसके