(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 319

304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अध्यक्षः यही बात प्रतीत होती है। मेरे विचार में सदस्यों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने का उनका कोई इरादा नहीं है। इसलिये मेरा सुझाव यह है कि

खंड दो को सभा में मतदान के लिये रखने और फिर मामले को स्थगित करने के बजाय, हम विधयेक के खंड सम्बन्धी प्रस्ताव को रखे बिना सभा को स्थगित कर देते हैं और नैतिक वचनबद्धता के रूप में एक घोषणा कर देते हैं कि किसी भी विषय पर चर्चा को स्थगित करवाने के प्रयोजन से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाया जायेगा।

कुछ माननीय सदस्यः नहीं-नहीं।

माननीय अध्यक्षः यह बहुत महत्वपूर्ण है। जब विधि मंत्री इस बारे में वक्तव्य दे रहे थे, यद्यपि मैं उनकी बात को और तर्क की शक्ति को समझता था, मैं स्वयं अपनी अन्तिम राय व्यक्त नहीं कर रहा। भूल-चूक हो सकती है। किसी भी व्यक्ति को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह प्रत्येक सदस्य को सभा में स्थगन प्रस्ताव लाने से, यदि वह चाहे तो, रोक सकता है। अध्यक्ष पीठ उसको मतदान के लिए रखने से इस आधार पर इन्कार कर सकता है कि वह विलम्बकारी प्रस्ताव है। परन्तु यह उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा जब ऐसा प्रस्ताव लाया जायेगा। वस्तुतः मेरे विचार में इसमें कोई अन्तर नहीं पड़ता कि खंड 2 को मतदान के लिये रखने के बाद सभा को स्थगित कर दिया जाये। इसलिये, जैसा कि मैंने कहा है, मैं इस सभा के सदस्यों के लिये नैतिक वचनबद्धता के बारे में एक घोषणा कर दूंगा कि जहां तक इस विधेयक का सम्बन्ध है कोई विलम्बकारी प्रस्ताव न लाया जाये और तत्पश्चात् इस मामले को स्थगित कर दूंगा। इसलिये मैं बार-बार संवैधानिक मामला उठाये जाने के पक्ष में नहीं हूँ और न ही मैं चाहता हूँ कि यह मामला बार-बार उठे कि ऐसा प्रस्ताव लाया जा सकता है अथवा नहीं। मैं कार्य को स्थगित करने वाला हूँ और सरकार...

डॉ. अम्बेडकरः क्या ये प्रस्ताव ऐसे ही रहेंगे?

माननीय अध्यक्षः ये प्रस्ताव निरर्थक हो जायेंगे।

डॉ. अम्बेडकरः इन प्रस्तावों की क्या स्थिति होगी?

माननीय अध्यक्षः सदस्यों ने उन पर जोर नहीं दिया है। यदि वे उन पर जोर देते तो मैं उनको सभा में मतदान के लिये अवश्य रखता।

कुछ माननीय सदस्यः उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा।

माननीय अध्यक्षः मैंने उनसे पूछा था।

श्री आर.के. चौधरीः अब चूंकि नैतिक प्रश्न, उठाया गया है, मैं चाहूंगा कि मेरा प्रस्ताव सभा के मतदान के लिये रखा जाये और सभा निर्णय करे कि क्या यह विलम्बकारी है या नहीं है।