संपादकीय - Page 326

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  1. भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875

  2. संरक्षक और प्रति पाल्य अधिनियम, 1890

  3. 1929 का सम्पत्ति हस्तांतरण (संशोधन) संबंधी अनुपूरक अधिनियम, XXI । इस

अधिनियम से 1914 तथा 1921 के मद्रास अधिनियम तथा 1916 का हिंदू सम्पत्ति

निर्वर्तन अधिनियम जो अजन्मे लोगों के पक्ष में संपत्ति के हस्तांतरण और वसीयत

के पक्ष में है, संशोधित किया गया है।

  1. हिंदू विद्या धन अधिनियम, 1930। इस अधिनियम से विद्या द्वारा प्राप्त सभी

सपंत्तियों को अर्जक की अलग संपत्ति माना गया है।

  1. हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम,1937 का XVIII यहां पर इसका भी ध्यान

रखना चाहिए कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 हिंदू विधि साक्ष्य के नियमों

को निष्प्रभावी कर देता है। इसी तरह भारतीय दंड संहिता, 1859 सम्पूर्ण हिंदू दंड

विधि को निरस्त कर देता है।

यद्यपि संसद द्वारा इस दिशा में किये गये प्रयासों की गति धीमी थी फिर भी इन विधायी प्रयासों का प्रभाव पड़ना सुनिश्चित था क्योंकि ये प्रयास उस सामाजिक बदलाव का हिस्सा थे जिनकी पूर्ति की हमारे संविधान में परिकल्पना की गयी थी।

प्रस्तुत खंड में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा 11 अप्रैल, 1947 को संविधान सभा में पेश किये गये हिंदू संहिता विधेयक से संबंधित पूरी चर्चा दी गई है। इस विधेयक को 9 अप्रैल, 1948 को प्रवर समिति को सौंप दिया गया था। इसके बाद 4 वर्षों तक संसद में इस पर चर्चा होती रही और फिर भी किसी निष्कर्ष पर न पहुंचा जा सका। डॉ. अम्बेडकर के शब्दों में यह विधेयक बिना-सराहे, बिना अफसोस प्रकट किये ही समाप्त हो जाने दिया गया। स्वाधीन भारत की संसद में यह एकमात्र ऐसा विधेयक था जिस पर इतने अधिक लम्बे समय तक चर्चा हुई थी। डॉ. अम्बेडकर को ऐसा महसूस हुआ कि सरकार और सत्ताधारी दल अर्थात् कांग्रेस हिंदू संहिता विधेयकको पारित कराने में दिलचस्पी नहीं रखते। इसलिए उन्होंने 27 सितम्बर, 1951 को पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपना त्याग-पत्र सौंप दिया, लेकिन प्रधानमंत्री के अनुरोध पर वे 10 अक्तूबर, 1951 तक संसदीय चर्चाओं में भाग लेते रहे। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि वे हिंदू संहिता विधेयक को सर्वाधिक महत्व देते हैं और इस विधेयक को पारित हुआ देखना चाहते हैं। भले ही इसके लिए उनके स्वास्थ्य पर कितना ही बुरा प्रभाव क्यों न पड़े। वे चाहते थे कि इस विधेयक पर प्राथमिकता के आधार पर 16 अगस्त को ही चर्चा आरम्भ करा दी जाये और 1 सितम्बर, 1951 तक इसे पारित कर दिया जाये। लेकिन