हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 33

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है और यदि वह कोई परिवर्तन करता है तो माननीय अध्यक्ष ने यह निर्णय दिया है कि विधेयक वापस हो, इस विधेयक पर आगे विचार-विमर्श नहीं हो सकता।

माननीय उपाध्यक्षः कानून की स्थिति स्वीकार की जाती है। इसके बारे में बहस की आवश्यकता नहीं है। मैं नहीं सोचता कि मान्य विधि मंत्री, कानून की स्थिति को नकारते हैं कि वह परिवर्तन करने के अधिकारी नहीं हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः नहीं।

माननीय उपाध्यक्षः ख्..., कोई भी अल्पविराम या अर्द्ध विराम या जैसा कि प्रवर समिति द्वारा स्वीकार किया है को छोड़कर परन्तु यह उनके लिए छूट है कि वह ऐसी बात को चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत करें। मेरे विचार से यह अध्यक्षीय आसम्दी का आदेश था, मान्य सदस्य अपना भाषण जारी रख सकते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः श्रीमान, अति विनम्र भाव से मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ कि यदि कोई अन्य मूल विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है तो मुझे उसमें कोई आपत्ति नहीं होगी। यदि सदन में इस विधेयक पर इस प्रकार विचार किया गया होता तो किसी को भी इस पर कोई आपत्ति नहीं होती। किंतु विधेयक इस प्रकार प्रस्तुत किये जाने के बाद तो विधेयक को उपबंध और शब्दशः तकनीकी रूप से विचार किया जाना है। यदि इस प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया गया और यदि यह विधेयक प्रवर समिति को भेजा गया और प्रवर समिति में इस पर उपबंध और शब्दशः विचार नहीं किया गया, तब मैं यह पूछना चाहूँगा कि यदि पहला विधेयक मान्य सदस्य के समक्ष था अथवा उसकी जेब में था अथवा वह अपने घर पर उस विधेयक को पढ़ने के बाद यहां आये थे। श्रीमान मैं आपका ध्यान संसदीय प्रक्रिया की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि प्रवर समिति के किसी सदस्य को इसके विरुद्ध कोई दावा नहीं करना है। मेरे पास इसके सशक्त कारण हैं। और श्रीमान, मैं आपका ध्यान उनकी ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। प्रथम स्थान में शायद बहुमत की रिपोर्ट में ऐसा लिखा गया हैः फ्हमने अपना विचार-विमर्श दुबारा तैयार किए विधेयक तक ही सीमित रखा है।य्

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः क्या मैं हस्तक्षेप कर सकता हूँ? यह सही नहीं है।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मूल विधेयक पर, वास्तविक अर्थ के सदंर्भ में खंडवार और शब्दवार विचार नहीं किया गया है। आम भाषा में जैसे कि माननीय अध्यक्ष ने कहा था और उस अर्थ में जिसमें श्री बाल कृष्ण शर्मा ने सदन के समक्ष निवेदन किया था, वह विधेयक हमारे समक्ष है। तब, मुझे इसे विधेयक के विरोध में कोई आपत्ति नहीं है। मैं स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ जो कुछ श्री बाल कृष्ण शर्मा और माननीय अध्यक्ष ने कहा हैख्...,(यहां हिंदी में भाषण का अंग्रेजी में अनुवाद खत्म होता है)।