हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 34

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श्रीमती दुर्गा बाईः व्यवस्था के प्रश्न पर। वे अध्यक्ष के आदेश पर प्रश्न उठा रहे हैं।

माननीय उपाध्यक्षः मैं माननीय सदस्य को समझता हूँ, यद्यपि मैं उनके प्रत्येक शब्द को नहीं समझ पाता, जो वे सोचते हैं। मैं इस बात के लिए बाध्य हूँ कि अध्यक्ष के आदेश की रक्षा की जाए। मैं यह देखने में रुचि नहीं रखता कि मैंने आज क्या कहा है, पर मैं अपने बाद के किसी सभापति द्वारा कही गई बात से विचलित हो सकता हूँ। माननीय अध्यक्ष का आदेश मौजूद है यद्यपि मान्य सदस्य एक या दो बातों को बलपूर्वक कहते हैं, पर मैं समझता हूँ कि वे सदन को यह बताना चाहते हैं कि देश को ऐसा अवसर प्रदान किया जाए कि लोग इस विधेयक पर विचार करें। यही वह सब है, जो उनका अभिप्राय है। ( मान्य सदस्य -फ्नहीं, नहींय्) मैं तत्काल यह बता देता हूं कि मैं माननीय अध्यक्ष के आदेश के पीछे से हटने का कोई इरादा नहीं है। यहाँ उन तर्कों का स्वागत है, जो व्यापक रूप से देश के इस सदन के विचारार्थ बड़ी आशा में प्रस्तुत किये गये हैं, परन्तु वे किसी भी दशा में अध्यक्ष के आदेश पर सवाल उठाने की भावना से नहीं है।

डॉ. मोहन दासः सूचना के प्रश्न पर, मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या माननीय सदस्य अगले दस मिनटों तक भाषण देंगे, कि हम जो हिंदुस्तानी समझ नहीं पाते अपने होटलों को वापिस चले जाएं?

पंडित ठाकुर दास भार्गवः चूंकि आपने प्रसन्नतापूर्वक यह बताया है कि आप मेरी बातों को समझ नहीं पाते और मैं चाहता हूँ कि मेरा प्रत्येक शब्द सदन द्वारा समझा जाए और आप भी उसे समझ सकें, अतः मैं अब अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी में बोलने का प्रयास करूंगा।

श्री टी.ए. रामलिंगम चेट्टिठ्ठयर (मद्रासः सामान्य)ः अभी तक आपने इस सदन के उन लोगों के बारे में विचार नहीं किया जो हिंदी नहीं जानते। इस सदन में ऐसे लोगों की संख्या काफी है, अतः यदि आप उनकी चिंता नहीं करते और यदि आप नहीं चाहते कि वे आपकी बातें सुनें, तो यह आपका अपना दृष्टिकोण है।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं पहले ही यह निर्णय कर चुका हूँ कि अब मैं अंगे्रजी में अपना भाषण दूँगा और मेरे मित्र के आदेश हैं। इसके पूरक आपने इसे कहने में जो प्रसन्नता व्यक्त की है, मैं अब अंग्रेजी में बोलूँगा।

माननीय उपाध्यक्षः जो कुछ अब तक सुना गया है, वह हिंदुस्तानी भाषा में सुना गया है।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं वह सब कुछ नहीं दोहराऊँगा, जो मैंने कहा है क्योंकि यह संभव भी नहीं होगा। भविष्य में, मैं आपसे पहले ही निवेदन कर दूँगा, जो