अनुभाग एक हिंदू संहिता विधेयक को प्रवर समिति को सौंपा जाना (17 नवम्बर, 1948 से 9 अप्रैल, 1948 तक) - Page 334

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इस विधेयक के माध्यम से स्त्रियों के उत्तराधिकार से संबंधित जो दूसरा परिवर्तन किया जाना है वह यह है कि स्त्री के उचित उत्तराधिकारियों की संख्या इस समय मिताक्षर अथवा दायभाग के अन्तर्गत आने वाले उत्तराधिकारियों से कहीं ज्यादा है।

इस विधेयक के द्वारा जो तीसरा परिवर्तन किया जाना है वह यह है कि पुराने कानून के अन्तर्गत, चाहे मिताक्षर हो अथवा दायभाग स्त्री उत्तराधिकारियों के मध्य भेदभाव किया गया था कि कोई स्त्री विशेष वसीयतकर्त्ता मृत्यु के समय धनाड्य हो अथवा गरीब, विवाहित हो अथवा अविवाहित, उसकी कोई संतान थी अथवा नहीं, इस विधेयक के माध्यम से हटा दिया गया है। इन सभी प्रावधानों को जिससे कि स्त्री उत्तराधिकारों में भेदभाव करता है अब इस विधेयक द्वारा हटा दिये गए हैं। किसी स्त्री को, जिसे विरासत का अधिकार है, उसका अधिकार इस तथ्य के आधार पर प्राप्त होता है कि उसे किसी अन्य बातों पर विचार किए बिना ही उत्तराधिकारी घोषित किया गया है।

इस विधेयक में जो अन्तिम परिवर्तन किया गया है वह दायभाग में विरासत के नियमों से संबंधित है। दायभाग के अन्तर्गत मां की अपेक्षा पिता को उत्तराधिकार में वसीयत दी जाती है। इस विधेयक में ठीक इसके विपरीत स्थिति है ताकि मां का स्थान पिता से पहले आए।

किसी मृतक हिंदू पुरुष के उत्तराधिकारियों के उत्तराधिकार की व्यवस्था के संबंध में, मैं इस विधेयक में उन प्रावधानों की तरफ आता हूँ, जो कि वसीयत के बिना सभी उत्तराधिकार से संबंधित है। जैसा कि इस सभा के सदस्य, जो कि हिंदू कानून से परिचित हैं, जानते हैं कि वर्तमान नियमों के अन्तर्गत किसी हिंदू स्त्री द्वारा प्राप्त संपत्ति को दो श्रेणियों में रखा गया है_ एक श्रेणी को उसका स्त्रीधन और दूसरी श्रेणी को ‘महिला की संपत्ति’ कहा जाता है। पहले इस स्त्रीधन के प्रश्न को लेते हैं_ वर्तमान नियमों के अन्तर्गत स्त्रीधन को कई श्रेणियों में रखा गया है_ केवल एक ही श्रेणी नहीं है_ और वर्तमान नियमों के अन्तर्गत किसी स्त्री के स्त्रीधन के उत्तराधिकार की व्यवस्था स्त्रीधन की श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग है। स्त्रीधन की एक श्रेणी के उत्तराधिकार के नियम दूसरी श्रेणी की अपेक्षा अलग-अलग हैं और ये नियम एक समान ही हैं जैसे कि मिताक्षर के नियम दायभाग के नियम की ही तरह लगते हैं। जहां तक स्त्रीधन का संबंध है, इस विधेयक में दो परिवर्तन किए गए हैं। एक परिवर्तन के माध्यम से स्त्रीधन की विभिन्न श्रेणियों को संपत्ति की एक ही श्रेणी में संघटित किया गया है और उत्तराधिकार को एक समान नियम बताया गया है_ स्त्रीधन की विभिन्न श्रेणियों के परिपेक्ष्य में स्त्रीधन के उत्तराधिकारियों की कोई श्रेणियां नहीं हैं। सभी स्त्रीधन एक ही तरह के हैं और उनके उत्तराधिकार का एक ही नियम है।

विधेयक के माध्यम से उत्तराधिकारों के संबंध में जो दूसरा परिवर्तन किया जाना है वह यह है कि पुत्र को भी स्त्रीधन प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है और उसे