320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पुत्री द्वारा ले जाए गए धन का आधा हिस्सा दिया गया है। सदस्य यह महसूस करेंगे कि विधेयक तैयार करते समय और उत्तराधिकार के नियमों में परिवर्तन करते समय यह नियम बनाया गया है कि जब पुत्री पिता की संपत्ति का आधा भाग प्राप्त कर रही है तो पुत्र को भी मां की संपत्ति का आधा भाग मिलना चाहिए। इस तरह विधेयक के जरिए विशेषतः पुत्र और पुत्री के बीच समानता की स्थिति बनाये रखने की कोशिश की गई है।
अब हम फ्महिला की भू-संपत्तिय् के प्रश्न पर आते हैं_ जैसा कि सभा के सदस्य जानते हैं, हिंदू कानून के अन्तर्गत, जब कोई महिला कोई संपत्ति प्राप्त करती है तो केवल ऐसी संपत्ति प्राप्त करती है जिसे फ्जीवन संपत्तिय् कहा जाता है। वह उस संपत्ति से प्राप्त आदमनी का लाभ उठा सकती है परन्तु, वह उस संपत्ति का समग्र रूप से, वैधानिक आवश्यकताओं को छोड़कर व्यापार नहीं कर सकती_ यह संपत्ति महिला की मृत्यु के बाद उसके पति के उत्तरभोगियों को प्राप्त हो जानी चाहिए। यह विधेयक यहां पुनः दो परिवर्तन प्रस्तुत करता है। यह सीमित भू-संपत्ति को पूर्ण भू-संपत्ति में उसी प्रकार परिवर्तित कर देता है जैसे कि कोई पुरुष विरासत में कुछ प्राप्त करता है तो वह पूर्ण संपत्ति प्राप्त करता है और दूसरे, यह विधवा के बाद संपत्ति पर दावा करने वाले उत्तरभोगियों के अधिकार को समाप्त करता है।
एक महत्वपूर्ण प्रावधान जो कि इस विधयेक में अन्तर्विष्ट संपत्ति प्राप्त करने के महिलाओं के अधिकार की अनुषंगी है, दहेज क संबंध में है। सभा के सदस्य जानते हैं कि दहेज कितना निन्दनीय है_ उदाहरण के लिए, लड़कियों के साथ, जो कि अपने माता-पिता से दहेज अथवा स्त्रीधन अथवा उपहार के रूप में बहुत सारा धन लेकर आती है, कितना घृणास्पद, निर्दयता और प्रताड़ना का व्यवहार किया जाता है। इस विधेयक में, मेरे निर्णय के अनुसार, एक सर्वाधिक उपयोगी प्रावधान यह है कि वह संपत्ति जो विवाह के अवसर पर दहेज के रूप में लड़की को दी जाती है, उसे ट्रस्ट की संपत्ति के रूप में समझा जाएगा, जिसका उपयोग महिला द्वारा ही किया जाएगा और वह इस संपत्ति पर अपना दावा 18 वर्ष की अवस्था पर ही कर सकेगी जिससे कि न तो उसका पति और न ही उसके पति के संबंधी उस संपत्ति में कोई रुचि दिखा सकें, न ही उनको उस संपत्ति को नष्ट करने का अवसर मिले और शेष जीवन के लिए उसे असहाय बना सकें।
अब हम भरण-पोषण से संबंधित प्रावधानों पर आते हैं। विधेयक के इस भाग में कोई अधिक नवीनता नहीं है। यह विधेयक उल्लेख करता है कि किसी मृतक के आश्रित उन लोगों से भरण-पोषण का दावा कर सकेंगे जो उसकी संपत्ति को या तो इच्छापत्र विहीन उत्तराधिकार के नियमों के अन्तर्गत अथवा उसकी वसीयत के माध्यम से प्राप्त करते हैं। इस विधेयक में 11 विभिन्न प्रकार से आश्रितों के बारे में बताया गया है। मैं सोचता हूँ कि कम से कम जब मैं स्वयं यह बात करूं तो, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात होगी कि एक