322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किए गए हैं। एक तो यह कि वर्तमान नियमों के अनुसार वैध सांस्कारिक विवाह के लिए जाति अथवा उपजाति का पता लगाने की आवश्यकता है परन्तु इस विधेयक ने इस शर्त से खुद को अलग कर दिया है। इस विधेयक के अन्तर्गत जो भी पक्ष विवाह करना चाहते हों जाति अथवा उपजाति पर ध्यान दिये बिना वैध माना जाएगा।
पंडित ठाकुर दास भार्गव (पूर्वी पंजाबः सामान्यत)ः यदि विवाह अलग-अलग जातियों के व्यक्तियों के बीच होता है तो क्या यह वैध होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे अपना भाषण जारी रखने दें। यदि माननीय सदस्य अपना भाषण देते समय प्रश्न रखता है तो मैं इसका उत्तर दूंगा।
इस विधेयक का दूसरा प्रावधान यह है कि गोत्र प्रवर की जानकारी से विवाह में कोई बाधा नहीं है जबकि वर्तमान नियमों के अन्तर्गत ऐसा प्रतिबन्ध है। तीसरी मुख्य विशेषता यह है कि पुराने नियमों के अन्तर्गत बहुविवाह की अनुमति थी। नये नियमों के अन्तर्गत एक ही विवाह के बारे में कहा गया है। सांस्कारिक विवाह ऐसा विवाह था जो टूट नहीं सकता था। इसमें कोई तलाक नहीं हो सकता था। वर्तमान विधेयक में विवाह विघटन के विधिक प्रावधानों को लागू करने से नये तथ्य प्रकाश में आयेंगे। कोई भी पक्ष जो इस नई संहिता के अन्तर्गत विवाह करता है वह विवाह के प्रावधानों से बचने के लिए तीन उपाय कर सकता है। एकµनिष्प्रभावी और शून्य घोषित करना होगा_ दूसराµविवाह को अवैध घोषित करना होगा और तीसराµविवाह का विघटन करना होगा। अब, विवाह को अवैध करने के दो आधार हैंः एक, यदि किसी पक्ष की विवाह के समय कोई पति/पत्नी जीवित है तो ऐसा विवाह निष्प्रभावी और शून्य होगा। दूसरा, यदि किसी पक्ष के संबंध निषिद्ध-संबंधों के परिक्षेत्र में आते हैं तो भी विवाह निष्प्रभावी और शून्य हो सकता है। विवाह को अवैध करार दिये जाने के चार आधार हैं। प्रथम, नपुंसकता, द्वितीयµदोनों पक्षों का सपिण्ड होना_ तृतीयµकोई भी पक्ष मूर्ख हो अथवा विक्षिप्त हो_ चतुर्थµसंरक्षणकर्ता की सहमति बलपूर्वक प्राप्त की गई हो। विवाह विघटन की शीघ्र संभावना से बचने के लिए, मेरे विचार से, विवाह के अवैध घोषित किए जाने की कार्यवाही समित कर दी गई है। यह बताया गया है कि विवाह को अवैध घोषित किए जाने के लिए वाद विवाह की तिथि से तीन वर्ष के अन्दर दायर कर देना चाहिए। अन्यथा वाद अवैध हो जाएगा और विवाह चलता रहेगा जैसे कि विवाह में अवैध होने का कोई आधार न रहा हो। विधेयक यह भी स्पष्ट करता है कि यद्यपि विवाह अवैध हो सकता है और न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किया जा सकता है फिर भी विवाह की अवैधता का जन्म लिए हुए बच्चों की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और वे हमेशा वैध बने रहेंगे।
अब तक तलाक के प्रश्न पर आते हैं। तलाक प्राप्त करने के सात आधार हैं। (1) परित्याग, (2) दूसरे धर्म को अपनाना, (3) रखैल रखना अथवा रखैल बनना, (4)