20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय मुझे कहना है ताकि मेरे प्रयास के लिए कुछ किसी न कहा जाएख्...,
श्री तजामुल हुसेनः किसी बात की पुनरावृति न हो।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं नहीं चाहता कि श्री तजामुल हुसेन मुझे कोई आदेश दें। यदि वे नहीं चाहते, तोख्...,
श्री तजामुल हुसेनः मैं सभापति को संबोधित कर रहा हूँ।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं नहीं चाहता कि श्री तजामुल हुसेन विवेकहीन बाधा डाले।
माननीय उपाध्यक्षः मुझे इस बात का दुख है कि श्री तजामुल हुसेन बार-बार हस्तक्षेप करते हैं। मैं यहां सदन की रक्षा के लिए हूँ। ताकि किसी बात की पुनरावृति न हो। यह दुर्भाग्य की बात है कि हमारा अधिकांश समय इस प्रकार बीत रहा है।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं दोहराना नहीं चाहता। मैं निवेदन करता हूँ कि जिस प्रकार मान्य अध्यक्ष ने अपना आदेश दिया है, मैं उसका आदर करता हूँ और मैं आदेश के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं कहूँगा। श्रीमान, आदेश अंतिम नहीं है।
श्री तजामुल हुसेनः इस सदन में यही अंतिम शब्द है।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं इन बातों को उलाहना देने की ओर नहीं जा रहा हूँ। मैं सोचता हूँ कि यह सदन अपने खुद के आदेश को संशोधित कर सकता है। मैं इस संबंध में एक पुस्तकः फ्डिसीजन्स ऑफ चेयरय् से एक आदेश कर सकता हूँ। इसी बीच उद्धृत सदन को यह विचार नहीं करना चाहिये कि मैं उपाध्यक्ष से यह निवेदन कर रहा हूँ कि वे इस स्थिति में आदेश की समीक्षा कर लें मैं ऐसा नहीं कर रहा हूँ अतः सदन को अधीर नहीं होना चाहिए। परन्तु मैं यह पूछना चाहता हूँ कि ऐसा कहां नियम है कि जब एक बार दिया गया आदेश संशोधित नहीं हो सकता? इस प्रकार का कोई नियम नहीं हैं। चूंकि मैं किसी भी आदेश के संशोधन का प्रयत्न नहीं कर रहा हूँ, अतः यह प्रश्न ही नहीं उठता। मैं यह बता रहा था कि अध्यक्ष का आदेश इस बारे में हुआ था कि इस विधेयक पर मसौदा पुनः तैयार किये गये विधेयक के साथ विचार किया गया था। वास्तविक अर्थ में नहीं और न ही तकनीकी सदंर्भ में, जिसमें हम समझते हैं कि फ्विचारय् का अर्थ क्या है। मैंने यहाँ आपके विचार के लिए निवेदन किया था कि तकनीकी दृष्टि से हम ‘विचार किया’ शब्द का प्रयोग करते हैं, इस दृष्टि से इस विधेयक पर कभी भी विचार नहीं किया गया।
श्री मोहन लाल गौतमः मैं यहाँ यह निवेदन करना चाहता हूँ कि यह उसी बात की पुनरावृति है जो उन्होंने हिन्दुस्तानी में कही थी।