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से पति का संबंध-विच्छेद को प्रमाणित करता है। यदि कोई व्यक्ति स्वतंत्रता चाहता है और उसे विदेशों में घूमने तथा जो चाहे सो करने का अधिकार है यदि वह पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह कर सकता है तो निश्चित रूप से पत्नी को भी पहली पति के होते हुए दूसरा विवाह करने का समान अधिकार होना चाहिए। इस स्थिति की कल्पना कीजिए। जब मैं किसी नवयुवक को हैट, बूट और सूट में देखता हूँ और उसके बगल में एक हिंदू स्त्री अच्छे कपड़ों में साड़ी पहने हुए जाती है तो मैं अपने मित्रों से पूछता हूँ, फ्क्या तुम अपने कपड़ों को विपरीत कर सकते हो? क्या पति धोती और पत्नी यूरोपियन महिला की तरह हैट और स्कर्ट पहनेगी तो वह कैसी लगेगी?य् यह बहुत ही बुरा लगेगा, इतना बुरा कि जैसे किसी अंग्रेजी में लिखे गए दस्तावेजों पर अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करना। एक बार एक आफिसर ने मुझसे कहा अंग्रेजी दस्तावेज पर तेलुगु में हस्ताक्षर न करें। तब मैंने कहा कि एक तेलुगु दस्तावेज पर अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करना भी उसी प्रकार से अनुपयुक्त होगा। अतः हमें अपनी माताओं, बहनों और पुत्रियों को पूर्ण स्वतंत्रता देनी चाहिए जिससे कि उन्हें, यदि आवश्यश्क हो, न्यायिक संबंध-विच्छेद और तलाक मिल सके। परन्तु मैं आशा करता हूँ कि विशिष्ट महिलाएं जो कि यहां पर हैं और जो महिलाओं के अधिकारों के लिए वर्षों से प्रयास कर रही हैं, इस तथ्य और सिद्धांत का प्रचार करेंगी कि तलाक एक सुरक्षित निधि है जिसे चालू खर्चे में नहीं डालना चाहिए कि तलाक, स्थिति में सुधार न होने पर अन्तिम उपाय के रूप में होना चाहिए। सार्वजनिक विचार, व्यक्तिगत प्रभाव, पारिवारिक प्रोत्साहन यह सब वहां पर है। आपको ध्यान देना चाहिए कि पति-पत्नी के बीच झगड़े दिन में होते हैं और प्रायः रात में शान्त हो जाते हैं। अतः इन झगड़ों का ज्यादा बढ़ने का अवसर नहीं है। हमें उसका ज्यादा शोर नहीं मचाना चाहिए। अमेरिका में एक राज्य है जिसे इण्डियनपोलिस कहते हैं जहां पर कुली लोग यह चिल्लाते हैंµफ्इणि् डनोलिस स्टेशन, तलाक के लिए बीस मिनट।य् रेलवे स्टेशन पर ही तलाक न्यायालय होते हैं। यदि किसी पति पत्नी के बीच ट्रेन में झगड़ा होता है तो वे तलाक के लिए आवेदन कर सकते हैं और ट्रेन चलने से पहले तलाक ले सकते हैं। हमारी स्थिति ऐसी नहीं होनी चाहिए। हमारे यहां तलाक सुरक्षित, निधि की भांति होनी चाहिए। महिला के आभूषणों की तरह, व्यक्तिगत और अत्यधिक आवश्यकता पड़ने पर ही इसका प्रयोग होना चाहिए और इसे कभी भी हल्केपन से उपयोग में नहीं लाना चाहिए।य्
अभिग्रहण (गोद लेना) का प्रश्न एक बहुत कठिन प्रश्न है। माननीय विधि मंत्री जी ने मिताक्षर के रीति-रिवाजों को दायभाग से मिश्रित कर दिया है। मैं समझता हूँ कि दायभाग बंगाल में प्रचलित है और मिताक्षर दक्षिण भारत में और बम्बई में एक कानून है जिसे मायुक्य कहा जाता है जिसके अनुसार गैर-ब्राह्मणों में पति की अनुमति की आवश्यकता नहीं है और कोई विधवा किसी बच्चे का दत्तक ग्रहण कर सकती है। मैंने 10-12 वर्ष पूर्व प्रिवी कौंसिल का एक निर्णय पढ़ा था। मैं चाहता हूँ कि उस