अनुभाग एक हिंदू संहिता विधेयक को प्रवर समिति को सौंपा जाना (17 नवम्बर, 1948 से 9 अप्रैल, 1948 तक) - Page 347

332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कानून की नकल की जाए जहां पर मिताक्षर के अनुसार ऐसा अभिग्रहण अनुमत्य नहीं है। आखिरकार कोई परिवार किसी बालक का अभिग्रहण (गोद लेना) क्यों करता है? अपनी वंश परम्परा को बनाए रखने के लिए। क्या किसी विधवा को अपने मृतक पति की भांति परिवार की वंश परम्परा को बनाए रखने का अधिकार नहीं है? क्या किसी वंश परम्परा को बनाए रखने के लिए पुरुष का ही एक मात्र अधिकार है जो कि मर चुका है। यदि कोई लड़का कोई संपत्ति विरासत में प्राप्त कर सकता है तो किसी मां के लिए उसके अधिकार के तहत अपने पति की लिखित अथवा पंजीकृत अनुमति के बिना अथवा किसी दस्तावेज अथवा वसीयत के बिना उसकी अपनी संपत्ति के लिए किसी लड़के को अभिग्रहीत करने हेतु छूट क्यों नहीं हो सकती? अंग्रेजी कानून में मौखिक वसीयत अनुमत्य है_ जहां लिखित वसीयत में दो हस्ताक्षरों की आवश्यकता होती है वहीं मौखिक वसीयत में ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है। अन्ततः मौखिक वसीयत द्वारा लाखों करोड़ों रुपयों की संपत्ति हस्तान्तरित होती है। किसी समाचार-पत्र का यह भाग कि फ्सब कुछ पत्नी के लिएय् एक वैधिक वसीयत मानी जाती है। तब एक पति के लिए अपनी पत्नी को मौखिक अनुमति देने के लिए किसी कानून में प्रावधान क्यों नहीं है जिससे कि वह अभिग्रहण (गोद लेना) कर सके। ये सब ऐसे मुद्दे हैं जिन पर प्रवर समिति को विचार करना होगा। ( एक माननीय सदस्यः फ्आखिर अनुमति क्यों?य्) यही तो मेरी बहस का विषय है। यदि अनुमति की आवश्यकता है तो मौखिक अनुमति क्यों नहीं? अभिग्रहण को विनियमित करने वाले कानून में जितना संभव हो सके उतनी छूट दीजिए।

तत्पश्चात् एक-पत्नी विवाह प्रथा का प्रश्न आता है। मुझे यह जानकर बहुत दुख होता है कि युवा लड़कियां अपनी युवावस्था में सभी परिस्थितयों को नहीं समझ पाती हैं जिस पर विवाह के लिए उचित वर के चयन हेतु ध्यान देना आवश्यक होता है। अंग्रेजी की एक पुरानी कहावत है जिसमें कहा गया हैः आपको संपन्नता, अच्छा चेहरा, परम्परा, वंशावली, संस्कृति पर विचार करना चाहिएµएक पति चुनने से पहले इन सब बातों पर विचार करना चाहिए। परन्तु, अब तो यह एक आम बात हो गई हैµऔर एक बहुत ही प्रतिष्ठित अधिकारी ने इस कथन को सही बताया हैµशिक्षित लड़कियों को तैयार पतियों को चुनने की आदत होती है, जिनकी पहले से ही पत्नी और 5-6 बच्चे होते हैं। ऐसा क्यों होता है? इन सब मामलों में ऐसा कॉलेज के दिनों में उस विषय पर शिक्षा की कमी के कारण होता है। फिर भी इन सभी बातों को निषिद्ध माना जाता है और प्रत्येक व्यक्ति उनके बारे में बात करने से हिचकता है यद्यपि इन मामलों के संबंध में अनिवार्यतः बहुत-सी निजी बातें होती रहती हैं। निषिद्ध फल कभी बिना स्वाद के नहीं रहता। अतः यह आवश्यक है कि हम इन सब मामलों में शिक्षा दें। एक बार मैंने अपने किसी मित्र से कहा थाµकि उन्होंने अपनी पुत्री को अपना दामाद चुनने के लिए स्वतंत्रता दे रखी है। तो अपनी बातचीत के दौरान उन्होंने मुझे एक कहानी बताई जिसको मैंने उनके मनोरंजन के लिए उनकी पुत्री और दामाद के