अनुभाग एक हिंदू संहिता विधेयक को प्रवर समिति को सौंपा जाना (17 नवम्बर, 1948 से 9 अप्रैल, 1948 तक) - Page 349

334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गई है। ये हमें बिल्कुल अन्तिम चरण में उपलब्ध कराये गये। यदि यह वांछित था कि माननीय सदस्य उसे पढ़ें, उनका विश्लेषण करें और अपने विश्लेषणें के परिणाम से सभा को अवगत करायें तो मैं समझता हूँ कि इसके लिए समय बहुत कम है। हिंदू कानून समिति के प्रतिवेदन पर एक पेम्फलेट है जिसमें बहुत से अभिमतों का समावेश किया गया है। मुझे खेद है कि सदस्यों के पास इसे नहीं भेजा गया था। ( एक माननीय सदस्यः फ्यह भेजा गया था।य्) नहीं, यह नहीं भेजा गया था। यह पुस्तक परिचारित नहीं की गई थी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह पुस्तक पुस्तकालय में काफी समय तक रखी गई थी।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह पुस्तकालय में बहुत दिनों से नहीं रखी थी। इसे अभी-अभी ही पुस्तकालय में रखा गया है। मुझे इसे बाजार से खरीदना पड़ा था। अभी हाल ही में इसकी कुछ प्रतियां पुस्तकालय में रखी गई हैं।

प्रो. एन.जी. रंगा (मद्रासः सामान्य)ः यह क्या है?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः जब प्रोफेसर रंगा जैसे माननीय सदस्य पूछते हैं किः ‘यह क्या है’ तो यह यही प्रदशि्र्ात करता है किख्...,

प्रो. एन.जी. रंगाः मैंने पूछा था कि आप जिसके बारे में बात कर रहे हैं, वह क्या है?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह हिंदू विधि समिति का प्रतिवेदन है।

प्रो. एन.जी. रंगाः अर्थात्, यह राव समिति है। इसकी रिपोर्ट तो एक वर्ष से अधिक समय से सार्वजनिक रूप से पड़ी हुई है।

माननीय अध्यक्षः यह जो कुछ भी है, माननीय सदस्य आप आगे बोलिए।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह प्रतिवेदन अभी हाल ही में प्रकाशित हुआ है। मैं कहना चाहता हूँ कि इस प्रतिवेदन में न्यायमूर्ति स्वर्गीय डी.एन. मित्तर ने एक प्रतिकूल टिप्पणी की थी। उन्होंने इस विधेयक के विरोध में बहुत से विचार संग्रहीत किए हैं। मैं इसे पढ़ना नहीं चाहता। उन्होंने इसे राज्य-दर-राज्य और विषय-दर-विषय में वर्गीकृत किया है। इस पर चर्चा करने हेतु पर्याप्त समय नहीं है परन्तु उन्होंने कहा है कि इस विधेयक के सिद्धांतों का पूरा हिंदू समुदाय विरोध कर रहा है, वह इस समुदाय का रूढि़वादी वर्ग है।

मैंने इतने समय में जितना संभव हो सका, ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। सरकार द्वारा विधेयक के संबंध में नये अभिमत प्राप्त किए गए हैं। जिसे हमें वितरित किया गया। मैंने पाया कि विधेयक के विरोध में बहुत से अभिमत आए हैं। वास्तव में, जब समिति साक्ष्य ले रही थी तो बंगाल में भी सब साक्ष्य एक ही ओर थे। अब जो अभिमत