हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 36

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माननीय उपाध्यक्षः मैं इस बात के निःहितार्थ समझने का प्रयास करूँगा।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः इस प्रारम्भिक टिप्पणियों के बिना मैं अपनी बात नहीं समझा सकता था और वे जो जानते हैं उन्होंने महसूस किया होगा कि मैं इससे अधिक कुछ नहीं कह सकता था। मैं आपको आश्वस्त करने की दृष्टि से यह निवेदन कर रहा था कि वास्तव में, सही विचार-विमर्श जिसे तकनीकी दृष्टि से कहा जाए, दिया गया था फिर से मसौदा तैयार किये गये विधेयक को मैंने कहा था कि मैं कुछ खास तर्क प्रस्तुत करना चाहता था। प्रथमः रिपोर्ट यह कहती है कि फ्हमने फिर से मसौदा तैयार किये गये विधेयक के बारे में ही विचार-विमर्श को सीमित किया है।य् दूसरे, श्रीमान बक्शी टेकचन्द तथा बाल कृष्ण शर्मा की असहमति की टिप्पणी उसी बात को बताती है। मैं इसे आगे नहीं पढ़ना चाहता, क्योंकि सदस्यों ने इसको पढ़ लिया है और यह समय का दुरुपयोग होगा कि मैं इसे फिर से पढूं। जब श्री बाल कृष्ण शर्मा ने अपना भाषण दिया था तब माननीय अध्यक्ष ने प्रसन्नतापूर्वक उनके वक्तव्य को स्वीकार किया था। उन्होंने अपने भाषण में फिर वही बात दोहराई थी कि हमने फ्फिर से मसौदा तैयार किए गये विधेयक के बारे में अपना ध्यान केन्द्रित किया है।य् और जब आप रिपोर्ट देखते हैं तो आपको पता लगेगा कि रिपोर्ट में ही कुछ ऐसे संकेत हैं जैसे कि खंड 99 कि केवल फिर से मसौदा तैयार किए गये विधेयक पर ही तकनीकी दृष्टि से विचार किया गया था।

माननीय उपाध्यक्षः मैं इस बात को समझ नहीं पा रहा हूँ कि माननीय सदस्य इस संबंध में कहना क्या चाहते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मुझे खेद है कि मैं वह नहीं सुन सका जो श्री के. सी. शर्मा ने बोला था।

माननीय सदस्यगणः व्यवस्था! व्यवस्था बनाये रखें।

श्री तजामुल हुसेनः बैठ जाइए।

माननीय उपाध्यक्षः यदि आप मुझे अनुमति देंगे तो मैं इस बात को समझाने का प्रयास करूंगा। यहाँ दो प्रश्न हैं। यदि यह प्रश्न है कि इस विधेयक पर आगे विचार नहीं किया जाना चाहिए तो इस बात पर पहले निर्णय हो चुका है। यह विधेयक यहाँ विचार के लिए ही स्वीकार किया जा चुका है। अध्यक्ष ने पहले ही कहा था कि यह विधेयक प्रवर समिति के समक्ष था और अन्य संशोधनों के साथ इसे सदन में रखा गया था। अतः जहां तक इस विषय का संबंध है मैं तत्काल यह कह सकता हूँ कि मैं अध्यक्ष के आदेश से परे नहीं जा सकता। जहां तक दो वाणी व्यवहार संहिता के इसी तरह के एक मामले को छोड़कर इस संबंध में पुनः वैसे न किया जाये। यह अन्य बातों के लिए उदाहरण नहीं होना चाहिए। यदि यह किसी अन्य संदर्भ में सदन के समक्ष आता है तो अध्यक्ष तथा सदन के सदस्यों जो भी पारित हो उस आदेश पर ध्यान देना होगा। यहां पर ऐसी कार्रवाइयों में