अनुभाग एक हिंदू संहिता विधेयक को प्रवर समिति को सौंपा जाना (17 नवम्बर, 1948 से 9 अप्रैल, 1948 तक) - Page 352

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कर रही है कि लोगों के अभिमतों का सावधानी से अध्ययन नहीं किया जाता है। हमें इन अभिमतों पर बिन्दुवार कोई विश्लेषण नहीं मिला है। सदस्यों को विश्लेषण करने का समय दिया जाना चाहिए जिससे कि वे उन पर अपने विचार व्यक्त कर सकें। किसी निजी सदस्य के लिए तेज गति से अभिमतों का पढ़ना और उनका विश्लेषण करना, अपने मस्तिष्क विभिन्न कक्षों में उसे एकत्रित करना और उनका वर्गीकृत आकार में उपयोग करना बहुत कठिन है। किसी ऐसे महत्वपूर्ण मामले पर जैसे कि यह है, माननीय मंत्री जी के विभाग द्वारा अभिमतों को वर्गीकृत करना अत्यधिक वांछनीय हो तो, जैसे पहले इस तरह के मामलों में किया गया था, और तब उसे सदस्यों के पास भेजा जाना था ताकि वे प्रत्येक मुद्दे पर आपत्तियों अथवा समर्थन की दृष्टि से, अपने विचार रख सकें।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः सामान्य)ः विधि समिति के प्रतिवेदन में, वर्गीकरण, विश्लेषण और अन्य सभी बातें हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः टिप्पणी करने के लिए मैं आपका आभारी हूँ परन्तु मैं जिन अभिमतों की बात कर रहा हूँ वे प्रतिवेदन आने के बाद प्राप्त हुए हैं और परिचालित हुए हैं। तथ्य है कि जिन अभिमतों को विभाग ने परिचालित किय है, अभी हाल ही में प्राप्त हुए हैं और वे इस विधेयक में उसी प्रकार रखे गए हैं। परन्तु हिंदू कानून समिति के प्रतिवेदन में एकत्रित अभिमत विधेयक के प्रारूप को तैयार करने से पहले एकत्रित किए गए थे अर्थात् जांच स्तर पर। परन्तु माननीय सदस्य एक बात भूल गए हैं कि जिन अभिमतों की बात मैं कर रहा हूँ वे प्रतिवेदन में प्रकाशित नहीं हुए हैं। उनको अलग से मुद्रित और परिचालित किया गया था। ये ऐसे अभिमत हैं जिनके बारे में मैं करता हूँ। मैं समझता हूँ कि इनका सावधानी से विश्लेषण किया जाना था और विभिन्न बिन्दुओं के साथ इन्हें मुद्रित किया जाना था। महोदय, मैं इस मामले में अधिक मेहनत नहीं करना चाहता। व्यक्तिगत रूप से तो मैं इस विधेयक के पक्ष में हूँ परन्तु ये कुछ आपत्तियाँ भी हैं जिन्हें मेरे कुछ मित्रों ने मुझे उठाने के लिए कहा है। इसी वजह से मैंने इन्हें सभा में रखा है। इसके अतिरिक्त अन्य बहुत सारे मुद्दे हैं परन्तु वे स्वरूप में छोटे हैं। समय की कमी के कारण मुझे अपने भाषण को संक्षिप्त करना चाहिए। पुनः, किसी भी विधान को जनता का अभिमत का अनुशरण करना चाहिए। जनता में अभिमत उत्पन्न या नजरअन्दाज करने के बजाय हमें उनके विचारों का अनुसरण करना चाहिए और मैं यहां एक प्रसिद्ध व्यक्ति की उक्ति दे रहा हूँ जो कि आधुनिक राजनीति के जनक हैं और वे हैं एडमण्ड वर्कें। उन्होंने एक विशेष अवसर पर कहा था किःµ

फ्अनुसरण करना जनता की इच्छाओं का दमन न करना, दिशा देना और उसे एक रूप देना और तकनीकी जामा पहनाना, समुदाय की सामान्य भावना को विशिष्ट स्वीकृति देना ही किसी विधान का वास्तविक अन्त है।य्