338 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परन्तु, आपत्तियों में यह बताया गया है कि इस विधेयक के पीछे जनता का कोई अभिमत नहीं है। कुछ आपत्तियों में यह बताया गया है कि केवल कुछ शिक्षित वर्ग और अत्याधुनिक वर्ग के लोग ही इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। परन्तु जन-समूह, जिसमें बहुत से लोग अज्ञानी हैं, इसके प्रति उदासीन हैं और इस तरह इसका वयस्क प्रचार नहीं हुआ है, जितना इसे महत्वपूर्ण विषय पर किया जाना था। मैं इन परिस्थितियों में इस सभा में यह विचार करने हेतु निवेदन करना चाहता हूँ कि यदि यह सभा कुछ विवादित मसलों पर प्रवर समिति को कुछ निर्देश दे, तो यह अच्छा होगा परन्तु हम बिना कोई निर्देश देते हुए यह विधेयक भेज रहे हैं। इस संबंध में मुझे विधि मंत्री से कुछ स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। इन चंद शब्दों के साथ, महोदय, मैं आशा करता हूँ कि आपत्तियों में जो मुद्दे उठाये गए हैं उन पर सावधानी से विचार किया जाएगा और अपेक्षित निर्णय पर पहुंचा जाएगा।
प्रवर समिति के सदस्यों के संबंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। इस समिति में योग्यतम सर्वाधिक अधिकारयुक्त और सर्वाधिक जानकारी वाले सदस्य हैं और मैं आशा और विश्वास करता हूँ कि इस विधेयक के विरुद्ध जो आपत्तियां उठाई गई हैं उनके साथ पूरा न्याय किया जाएगा।
श्रीमती हंस मेहता (बम्बईः सामान्य)ः अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को सत्र के अन्तिम समय (6.00 बजे सायंकाल) में यह विधेयक लाने के लिए धन्यवाद देती हूँ। मैं श्री बी.एन. राव और उनके साथियों को इस प्रतिवेदन में उनके द्वारा किए गए महान परिश्रम के लिए, जिन पर ये सभी सिफारिशें आधारित हैं, बधाई देती हूँ और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ। हिंदू कानून को संहिताबद्ध करने संबंधी यह विधेयक बहुत ही क्रान्तिकारी विधेयक है और यद्यपि हम इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं परन्तु यह हिंदुओं के सामाजिक इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। परन्तु जब से इस विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया तब से बहुत-सी घटनाएं हुईं्र और जो इनमें से सबसे बड़ी घटना हुई थी वह है हमारी राजनीतिक स्वतंत्रता की प्राप्ति। हमारा नया संविधान बनने वाला है। हम उन मौलिक सिद्धांतों पर पहले ही सहमत हो चुके हैं जिन पर इस नए संविधान का प्रारूप तैयार किया जाना है। हमारा नया राज्य एक प्रजातांत्रिक राज्य बनने वाला है और प्रजातंत्र का आधार प्रत्येक व्यक्ति की समानता पर है। यह इस दृष्टि से भी है कि हमें अब विरासत और विवाह इत्यादि की समस्याओं तक पहुंचना है जो कि हमारे सामने हैं। प्रवर समिति को इसलिए यह देखना है कि नये विधेयक का प्रारूप सिद्धांतों पर हो।
यह सत्य है कि आचार-संहिता ने विरासत के संबंध में 6 भेदभावों को हटा दिया है। महिला को एक उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी गई है और वह पूर्ण अधिकार से अपनी संपत्ति का लाभ उठाने की हकदार हो गई है। अर्थात् इस आचार-संहिता ने