339
महिलाओं के सीमित भू-भाग का अधिकार समाप्त कर दिया है। इसके बाबजूद भी हम अनुभव करते हैं कि अभी भी यह पर्याप्त नहीं है। एक पुत्री जिसे उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता मिली है, संपत्ति प्राप्त करती है परन्तु वह पुत्र के हिस्से का आधा प्राप्त करती है। यह समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है जिसके बारे में हमने बारम्बार कहा है कि हमारा नया संविधान नई बातों पर आधारित होने जा रहा हैµएक संविधान जिसका उद्देश्य इस देश के लोगों के लिए न्याय देना है, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक। हम इसलिए महसूस करते हैं कि पुत्री को अपने पिता की संपत्ति में पुत्र के साथ समान हिस्सा मिलना चाहिए और पुत्र को अपनी मां की संपत्ति में पुत्री के समान हिस्सा मिलना चाहिए। यह भी तर्क दिया जाता है कि एक पुत्री को उसके पिता और साथ ही साथ उसके पति का हिस्सा मिलता है जबकि व्यक्ति को अपनी पत्नी से कुछ नहीं मिलता। हमने पहले ही प्रस्ताव किया था, जैसा कि महिलाओं के संगठन कह चुके हैं कि पति अपनी पत्नी की संपत्ति को भी उसी प्रकार प्राप्त कर सकता है जैसे कि पत्नी अपने पति की संपत्ति प्राप्त करती है। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम में, पति के उत्तराधिकार से संबंधित प्रावधान पहले से ही हैं और मैं समझती हूँ कि हमें उस प्रावधान की नकल करनी चाहिए।
लोगों ने तर्क दिया है और मेरे कुछ माननीय मित्रों ने, जिन्होंने मेरे पहले अपनी बातें कहीं हैं कि यदि पुत्री को उसका हिस्सा मिलता है विशेषकर भू-संपत्ति में, तो भूमि का विखण्डन हो जाएगा। परन्तु पुत्री के विरासत के मामले में ऐसा तर्क क्यों दिया जाता है। जब किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक पुत्र हैं तो भी ऐसी ही स्थिति होती है। यदि उसके पास कहें 4 या 5 पुत्र हैं तो भूमि बांटनी पड़ती है_ तब इस तथ्य को क्यों नहीं रखा गया। ऐसा तब किया गया जब पुत्रियों को संपत्ति प्राप्त करने का प्रश्न उठा है? यह अच्छा होगा यदि भू-विखण्डन के विरुद्ध लिए कोई कानून बनाया जाए और यदि यह निर्धारित सीमा से कम मिलती है तो इसे बेच देना चाहिए। इसका एक और विकल्प है भूमि का समूहीकरण।
अब मैं विवाह के प्रश्न पर बात करती हूँ। मुझे प्रसन्नता है और भारतीय महिलाएं भी यह जानकर खुश होंगी कि एक-पत्नी विवाह के सिद्धांत को मान्यता मिल गई है और यदि संहिता लागू हो जाती है तो एक-पत्नी विवाह का सिद्धांत स्थापित हो जाएगा। महोदय, हमने अनुभव किया है कि सभी सभ्य राष्ट्रों और सुसंस्कृत समुदायों ने एक-पत्नी विवाह के सिद्धांत को स्वीकार कर लिया है। महिलाओं का अनादर और महिलाओं पर किए जा रहे अत्याचार जिनके बार में हम सुनते हैं, मैं समझती हूँ कि इसका कारण यह है कि बहुविवाह का सिद्धांत अभी भी चलन में है। यदि हम एक-पत्नी विवाह को स्वीकारते तो मैं नहीं समझती कि महिलाओं का अपहरण होता, विवाह से उठा ली जातीं अथवा उनके साथ अन्य कुछ घटित होता। यह बहुत की महत्वपूर्ण सिद्धांत है और मैं आशा करती हूँ कि यह सभा इसे स्वीकार करेगी।