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संपत्ति में हिस्सा नहीं पाती हैं और इसीलिए मुझे प्रसन्नता है कि इस प्रकार का विधान जिसे आगे बढ़ाया जा रहा है। हिंदू महिलाओं को मुसलमान महिलाओं के समान रखेगा जहां तक उनके अधिकारों का संबंध है। महोदय, जैसा कि मैंने कहा कि समाज का कोई वर्ग इन उपायों का विरोध नहीं करेगा। यह एक आधारभूत निधि होते हुए और विभिन्न प्रकार से धर्म से जुड़ा होते हुए भी निश्चित रूप से हिंदू समाज के कुछ वर्ग ऐसे हैं जो इसका विरोध करेंगे परन्तु महादेय साहासिक कदम उठाने के लिए साहसी मस्तिष्क की आवश्यकता होती है। अतः, मैं आशा करती हूँ कि देश की रूढि़वादी विचारधारा जो इन विधानों का विरोध कर रही है, इसके पारित होने में बाधा नहीं डालेगी और मैं आशा करती हूं कि यह विधेयक, जो कि प्रवर समिति में जा रहा है, और भी सुधारात्मक रूप में आएगा और इन उपायों में विलम्ब नहीं होगा। समाज स्थिर नहीं होना चाहिए और जैसे-जैसे हम प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हैं, यह आवश्यक हो जाता है कि महिलाओ्र को अपने आप आगे आना चाहिए और जब तक भारत में महिलाएं आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो जातीं तब तक भारत का प्रगति के पथ पर आगे बढ़ना असंभव होगा। इन शब्दों के साथ मैं इन उपायों का पूरे हृदय से समर्थन करती हूँ।
श्री रोहिणी कुमार चौधरी (असमः सामान्य)ः महोदय, मैं सोचता हूँ कि मुझे इस विधेयक के प्रभारी माननीय मंत्री जी को बधाई देनी चाहिए। उनको आज के दिन का समय बहुत अच्छा लगा होगा जब उनको इन सभा में कुछ वर्ग के लोगों से शबाशी प्राप्त हुई है। परन्तु जब मैं यह कहूं कि इस विधेयक का नामकरण ठीक नहीं है तो मेरे द्वारा दुर्भावना सहित इसकी आलोचना किया जाना न समझा जाए_ यह एक हिंदू संहिता नहीं है बल्कि इसका नाम हिंदू महिलाओं की संहिता ज्यादा उपयुक्त होता। महोदय, धर्म निरपेक्ष सरकार की स्थापना और साम्प्रदायिक संगठनों पर विराम लगाने के लिए हमारे द्व ारा प्रस्ताव पास करने के बाद हमें 3-4 दिन ही कयों दिए गए, यह बात मैं समझ नहीं पाता, केवल एक विशेष समुदाय हेतु विधान पारित करने हम ऐसी जल्दबाजी में अपने रास्ते से अलग हो जाना चाहिए था। सभी साम्प्रदायिक संगठनों से मुक्त हो जाने के निर्णय के बाद मैं जानना चाहता हूँ कि हमें सोचने का और इस विधान पर जिसमें सभी राज्यों के विषय, हिंदू, मुसलमान, ईसाई आदि हैं, ध्यान केन्द्रित करने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। यदि माननीय मंत्री जी इस सभा से प्रभावित नहीं होते हैं तो मैं समझता हूँ कि इस विधेयक को वापस लेने के लिए अभी ज्यादा विलम्ब नहीं हुआ है और यदि वे इसको वापस ले लेते हैं और किसी बाद की तिथि पर और अधिक व्यापक विधेयक लेकर आने का वायदा करते हैं तो विधेयक को वापस लेने का उनका यह कार्य उस वापसी से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा जो अभी कुछ मिनट पहले उन्होंने किया है। मैं जानता हूँ कि हमारे देश की कुछ महिलाएं अपने भाइयों की पैतृक संपत्ति का कुछ हिस्सा लेने के लिए बहुत तत्पर हैं। मैं यह भी जानता हूँ कि इस देश की कुछ प्रभावशाली महिलाएं अपने विवाहों को