346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समाप्त करने की इच्छुक हैं जो कि उनकी अनिच्छा से हुआ था और जिसे वे असहनीय पा रही हैं। यह भी शायद एक सत्य है कि हमारे देश की कुछ शिक्षित और प्रगतिशील महिलाएं, जो किसी प्रकार के बहुविवाह के विरुद्ध हैं, इन चीजों को हटाने के लिए विधान लाने हेतु बहुत इच्छुक हैं। हिंदू संहिता अधिनियमित करने से, आप हिंदू जीवन, कानून और रीति-रिवाजों के पूरे ढांचे को क्रांतिकारी बना रहे हैं। परन्तु यह आप किसके लिए कर रहे हैं और इसे किसको लाभ मिलने वाला है? एक बहुत बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है और कृषि संपत्ति इस विधान की परिधि से बाहर है। क्या हमारे गांवों में गरीब हिंदू लोग तलाक के लिए भटक रहे हैं। क्या वे अपने माता-पिता से प्राप्त होने वाले संपत्ति के लिए परेशान हैं, बिल्कुल नहीं। यह विधान आप उन लोगों के लिए चाहते हैं जिनको आप हमारी जनता, महिला और पुरुषों में बुद्धिमान वर्ग के रूप में मानते हैं। यह धनी व्यक्तियों के लिए हैं जिसने अपनी पुत्री का विवाह गरीब से किया है जो अपनी पत्नी को समाज में कुछ महत्वपूर्ण स्तर देने की आशा करता था परन्तु वह दे नहीं पाया और उसकी पुत्री अप्रसन्न हो गई_ और इसलिए वह इस विवाह से छुटकारा पाना चाहता है। इस प्रकार का विधान इस प्रकार के व्यक्तियों की ही मदद करेगा।
तदुपरान्त, महोदय जहां तक व्यवहार और प्रथाओं का संबंध है, प्रथा हिंदू कानून में, जैसा कि मेरे प्रान्त में होता है, बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मैं अपने प्रान्त पर विशेष जोर देना चाहता हूँ क्योंकि प्रवर समिति में हमारा कोई प्रतिनिधि नहीं है। जैसा कि सभी वकील जानते हैं, असम में जिस प्रथा ने हिंदू कानून का स्थान लिया है, वह बहुत ही अनूठी है। मै फ्मणिराम कतीताय् बनाम फ्केरी कलितानीय् नामक प्रिवी कौंसिल के मामले का उदाहरण दे सकता हूँ जिसने हिंदुओं में प्रचलित हिंदू कानून में व्यापक परिवर्तन कर दिया है।
तदुपरान्त आदिवासी जनता का प्रश्न आता है। इस विधेयक के अनुसार उनको हिंदू समझा जाएगा और वास्तव में वे हिंदू हैं, यदि उन्होंने इस्लाम, अथवा, ईसाई अथवा बौद्ध धर्म स्वीकार नहीं किया है। क्या आप उन पर यह विधान थोपने जा रहे हैं? यदि आप उनसे इस प्रणाली को विरासत में अपनाने की बात कहते हैं तो वे सीधे आपके विरुद्ध
खड़े हो जाएंगे। असम में कई प्रकार की विभिन्न प्रथाएं है। असम के खसिया लोगों में, सबसे छोटी पुत्री को संपत्ति प्राप्त होती है। अब आप इसे विधवा को, पुत्र की विधवा को, विधवा पुत्री को, पुत्र की बहू को तथा इसे विधवा को, पुत्र की विधवा को, विधवा पुत्री को, पुत्र की बहू को तथा अन्य को दे रहे हैं। यदि आप इस कानून को उनके मध्य लागू करते हैं तो क्या वे इसे क्षणभर के लिए भी सह पाएंगे? आपने सांस्कारिक विवाह और सिविल विवाह आरम्भ किया है। क्या मैं आपको बताऊं कि कचारियों का विवाह किस प्रकार होता है? कुछ लड़के और लड़कियां आपस में जान-पहचान करते हैं और लड़की माता-पिता से जबरदस्ती ले ली जाती है जिसके बाद विवाह समारोह होता है?