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क्या आप उसे रजिस्ट्रार के कार्यालय और वहां विवाह करने के लिए कहेंगे।
इसके बाद, मैं दहेज के बहुत खिलाफ हूँ। धनी व्यक्ति जो दहेज दे सकते हैं, अपनी पुत्रियों का विवाह शीघ्र ही कर देते हैं चाहे वे अन्धी हो अथवा भद्दी हों। यदि मेरे पास धन नहीं है तो मैं दहेज देने के लिए अपने मकान और प्रत्येक वस्तु जो मेरे पास है को गिरवी रख दूंगा और इस प्रकार मुझे अपनी पुत्री से मुक्ति मिल जाएगी। परन्तु अब क्या होगा? पुत्री भी संपत्ति का हिस्सा प्राप्त करेगी। तो जब मैं दुल्हनें अपने पुत्रों के लिए ढूंढ़ता हूµभाग्यवश मेरे 5 पुत्र हैं। मैं उन परिवारों को देखूंगा जहां पर पुत्रियाँ कुछ धन प्राप्त करेंगी और किसी सामान्य व्यक्ति के पास नहीं जाऊंगा जिनको धन उधार लेना पड़ता है अथवा संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती है। क्या आप इस तरह से गरीब लोगों के लिए कानून बनाने जा रहे हैं। गरीबों के लिए केवल कृषि ही संपत्ति है। यदि आप चाय के बागानों को भी शामिल कर दें, यह अलग बात है, परन्तु उनके बीच कोई कृषि संपत्ति नहीं है। इस प्रकार उनको विरासत में अधिक धन मिलने का कोई प्रश्न ही नहीं है अतः एक गरीब की पुत्री यद्यपि वह सुन्दर है, गुणवान है फिर भी उसके लिए कोई अवसर नहीं है। मैं समझता हूँ कि इस विषय पर गंभीर विचार करने की आवश्यकता है जहां तक प्रथाओं, व्यवहारों और अन्य मुद्दों का संबंध है और इसलिए इस विधान को जल्दी में पारित करना उचित नहीं है। मुझे और भी बहुत कुछ कहना चाहिए था, महोदय, परन्तु इस सभा में ऐसे भी व्यक्ति हैं जो कि अभी भी अविवाहित हैं_ अतः इस विधेयक के संबंध में मेरी अपनी सभी आपत्तियों को प्रकट करना ठीक नहीं होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अध्यक्ष महोदय, मेरा काम इस बात से बहुत हल्का हो गया है कि इस विधेयक को इस सभा में पर्याप्त समर्थन प्राप्त हुआ है। अतः मैं उत्तर देते समय अपने आपको कुछ उन मुद्दों तक ही सीमित रखूंगा जिन्हें वक्ताओं ने उठाया है, जिन्होंने इस चर्चा में भाग लिया है।
मैं माननीय मित्र नजीरुद्दीन द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से शुरू करता हूँ। महोदय, मैंने सोचा कि विधायिक कोई न्यायालय नहीं है और इस सभा का एक सदस्य, जो कि वकील है, निश्चित रूप से यहां वकालत करने अथवा मुकदमा लड़ने नहीं आता है। परन्तु किसी तरह से मेरे मित्र ने, चाहे फीस लेकर अथवा पूरी सहानुभूमि से अपने कुछ मुवक्किलों के विचारों से प्रतिनिधित्व का कार्य शुरू किया है जिनको अपने मस्तिष्क में रखी हुई बातों को कहने की हिम्मत नहीं थी। तथापि, मैं कोई तकनीक आपत्ति नहीं उठाऊंगा बल्कि उनके द्वारा उठाये गए मुद्दों पर कुछ कहूंगा।
महोदय, उनकी शिकायत थी कि इस विधेयक का पर्याप्त प्रचार नहीं किया गया और जनता को उतना पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया जितना कि इन उपायों को ध्यान में रखते हुए दिया जाना चाहिए था। मुझे सोचना चाहिए था कि मेरे मित्र के मुवक्किलों ने