348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उनको इस संबंध में गलत सूचना दी है। इस विधेयक के विधानों का उत्पत्ति वर्ष 1937 से प्रभावी हुए एक विधान से हुई। उस वर्ष से इस विधेयक के उपबंध एक तरफ से दूसरी तरफ, एक समिति से दूसरी समिति, तक चर्चा का विषय बने रहे। उदाहरणार्थ, वर्ष 1941 में, गृह विभाग ने उन कठिनाइयों पर विचार करने के लिए एक समिति नियुक्त की जो महिलाओं के संपत्ति का अधिकार अधिनियम, 1937 के कारण सामने आई थी। समिति का कार्य कठिनाइयों को बताना और उनका हल करने के लिए सुझाव देना था। राव समिति के नाम से जानी जानेवाली इस समिति ने अपना प्रतिवेदन 19 जून, 1941 को दिया। मेरे माननीय मित्र ने यदि इस प्रतिवेदन को देखा होता तो जानते कि समिति के प्रस्तावों को कितना ज्यादा प्रचार मिला, जारी की गई प्रश्नावलियों को प्राप्त हुए वक्तव्यों को, जांच किए गए साक्ष्यों को, स्थानीय जनता का विचार करने के लिए राज्यों का किए गए दौरों को। वर्ष 1942 में इसी समिति ने पुनः दो विधेयक प्रारूप प्रस्तुत किए जिसमें से एक उत्तराधिकार के संबंध में और दूसरा विवाह के संबंध में था। हिंदू उत्तराधिकार विधेयक, 1943 में सदन में पेश किया गया था। वह दोनों सभाओं की संयुक्त समिति को भेजा गया था। उस संयुक्त समिति ने पुनः लोगों के विचार आमंत्रित किए और उसका एक खंड तैयार करके उस समय के विधानमंडल में परिचालित किया गया था। इन सब बातों पर विचार करने के बाद, मुझे विश्वास है कि मेरे मित्र द्वारा किया गए वक्तव्य कि सरकार ने पर्याप्त प्रचार नहीं किया, सत्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने न्यायमूर्ति मित्तर के अल्पसंख्यक प्रतिवेदन का भी उल्लेख किया है जहां पर उन्होंने इस विधेयक में अन्तर्विष्ट विभिन्न मुद्दों का पक्ष और विपक्ष के दृष्टिकोण से विश्लेषण भी किया है। महोदय, मैं एक समिति के सदस्य के लिए कुछ अपमानजनक बातें नहीं कहना चाहता हूँ, जिन्होंने इतना उपयोगी कार्य किया है परन्तु मैं यह कहने से
खुद को नहीं रोक पा रहा हूं्र कि ये सदस्य अपने खुद के अभिमत से दूर भाग गये। यदि मेरे माननीय मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद बहुमत वाले प्रतिवेदन को पढ़ें तो वे पायेंगे कि इस विधेयक में अन्तर्विष्ट सभी प्रस्ताव, जो महिलाओं को अधिकार प्रदान करते हैं, वर्ष 1930 में समिति के इस सदस्य के एक प्रकाशन पर आधारित हैं। इस पुस्तक में उन्होंने विचार व्यक्त किया था कि निर्णय विधि, जिसने महिलाओं के अधिकारों को सीमित कर दिया था, का कोई आधार नहीं था। अंततः उन्होंने किस कारण से यह निवेदन नहीं किया कि इस तर्क में कोई दम नहीं है, यह तो वे ही जानते हैं।
मेरे माननीय मित्र ने इस तथ्य का भी उल्लेख किया है कि यह विधेयक आखिरकार कृषि भूमि के अलावा संपत्ति तक ही समिति है। इस तथ्य से उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि यह केवल आंशिक संहिताबद्ध है क्योंकि संपत्ति का एक बहुत बड़ा भाग, जो कि विरासत से संबंधित विषय है, इस विधेयक के उपबंधों से अछूता हुआ महसूस किया जाता