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और बशर्ते कि उस स्थिति में जब एक नियम एक परिवार पर लागू होता है। उसे परिवार द्वारा अनियमित न किया गया हो।
( ii ) ‘जिला न्यायालय’ का अर्थ है मौलिक क्षेत्राधिकार का प्रमुख दीवानी न्यायालय और धारा 44 और 49 के अतिरिक्त इसमें सामान्य मौलिक दीवानी क्षेत्राधिकार के व्यवहार में उच्च न्यायालय भी शामिल हैः
भाग 1,
खंड 5 (घ) पृष्ठ 2
आगे शर्त यह है कि केवल एक परिवार पर लागू होने वाले
एक नियम के मामले में जिसे परिवार द्वारा अनियमित न किया गया हो।
( iii ) पूर्ण रक्त संबंध और अर्द्ध रक्त संबंधµदो व्यक्ति आपस में खून के पूरे रिश्ते से संबंधित तब कहे जाते हैं जब वे उसी पत्नी से जन्म लेते हैं और उनके पूर्वज एक ही हैं। खून के आधे रिश्ते से आशय है कि विभिन्न पत्नियों द्वारा जन्म लेते हैं। हालांकि उनके पूर्वज एक ही होते हैं।
( iv ) फ् विपितृ रक्त रिश्ताय् दो व्यक्ति को आपस में विपितृज रक्त संबंध से संबंधित तब कहा जाता है जब वे एक ही पुरखिन से पतियों (पुरुषों) से जन्म लेते हैं_ लेकिन उनके अलग-अलग होते हैं।
व्याख्या- उपखंड ( iv ) और ( v ) में ‘पूर्वज’ में पिता शामिल हैं और ‘पुरखिन’ में माता शामिल है।
( v ) ‘मरूमकट्यम कानून’µयह कानून प्रणाली ऐसे व्यक्तियों पर लागू होगीःµ
(क) जो, यदि संहिता पारित न की जाती हो, मद्रास मरूकट्यम अधिनियम, 1932,
(1933 का मद्रास अधिनियम XXII ), 1100 का त्रावनकोर अधिनियम II,
उझावा अधिनियम III, नन्जिनाद वेल्लाल अधिनियम 1101, त्रावनकोर, 1100
का त्रावनकोर क्षत्रिय अधिनियम III, 1108, त्रावनकोर कृष्णावश-मरूमुक्कथयी
अधिनियम, 1115, 1107 का कोचीन थिया अधिनियम VIII, 1113 कोचीन
नामर अधिनियम XXVII द्वारा नियंत्रित किये जाते हों_ अथवा
(ख) जो ऐसे समुदाय से संबंध रखते हों, जिसके सदस्य ज्यादातर त्रावनकोर-कोचीन
राज्य में अथवा मद्रास राज्य के निवासी हो और जो, यदि यह संहिता पारित
न की जाती तो वंशानुक्रम की किसी भी प्रणाली से, जिसमें वंश की पहचान
स्त्री से होती हो, अधिशासित किये जाते_ परन्तु इसमें अलियसंतना कानून
शामिल नहीं हैं।