360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
( vi ) ‘नाम्बूदरी विधि’ का अर्थ-ऐसी विधि जो ऐसे व्यक्तियों पर लागू होती है जो, इस
संहिता के पारित न होने की स्थिति में, मद्रास नाम्बूदरी अधिनियम, 1932 (1993
का मद्रास अधिनियम XXI ), कोचीन नाम्बूदरी अधिनियम (1114 का XVII
अथवा 1106 का त्रावनकोर मलयाला ब्राहमन अधिनियम (1106 का विनियमन
III ) द्वारा अधिशासित किये जाते।
( viii ) फ्भागय् का अर्थ है कि इस संहिता का एक भाग।
( ix ) ‘निर्धारित’ का अर्थ है कि इस संहिता के अन्तर्गत बनाये गये नियमों द्वारा प्रर्दिष्ट
किया गया।
( x ) ‘संबंधित होना’ का अर्थ विधिक सगोत्रता से संबंधित होना हैः
परन्तु अवैध संतानों को उनकी माँ से और आपस में एक दूसरे से संबंधित होना
माना जायेगा और उनका विधिक वंशानुक्रम उन्हीं से संबंधित हो समझा जायेगा, और
रिश्तेदारी तथा संबंध बताने वाले शब्दों की व्याख्या तदनुसार ही की जायेगी।
( xi ) ‘पुत्र’ में दत्तक पुत्र भी शामिल है चाहे उसे इस संहिता के आरम्भ से पूर्व अथवा
बाद में दत्तक बनाया गया हो परन्तु इसमें कोई अवैध पुत्र सम्मिलित नहीं है।
( iii ) पूर्ण रक्त संबंध और अर्द्ध रक्त संबंधµदो व्यक्तियों का आपस
में पूर्ण रक्त संबंध तब माना जाता है जब वे एक ही पत्नी खंड 5 (ड.)
द्वारा उसी पूर्वज से जन्म लिए हों और अर्द्ध रक्त संबंध तब माना
जाता है जब वे अलग-अलग पत्नियों द्वारा पूर्वज से जन्म लिये हों।
( iv ) ‘विपितृज रक्त संबंध’µदो व्यक्तियों का आपस में विपितृत रक्त
संबंध तब माना जाता है जब वे उसी पुररखिन द्वारा अलग-अलग
पतियों से जन्म लियें हों।
खंड 5 (ड.)
व्याख्याः इस उपखंड के अनुसार ‘पूर्वज’ में पिता और ‘पुराखिन’ में माता शामिल है।
( v ) फ्भागय् का अर्थ है कि इस संहिता का कोई भाग। खंड 5 (ड.) ( vi ) फ्प्रदिष्टय् का अर्थ है कि इस संहिता के अन्तर्गत बनाये गये
नियमों द्वारा प्रदिष्ट किया गया।
( vii ) फ्संबंधित होनाय् का अर्थ विधिक सगोत्रता है। परन्तु अवैध सन्तानों को उनकी मां से और आपस में एक-दूसरे से संबंधित होना माना जायेगा और उनका विधिक वंशनुक्रम उन्हीं से और आपस में एक दूसरे से संबंधित होना समझा जायेगा_ और रिश्तेदारी तथा संबंध बताने वाले शब्दों की व्याख्या तदनुसार ही की जायेगी।