अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 378

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भाग दो विवाह और तलाक
अध्याय 1
विवाह

(5) व्याख्याः इस भाग में, जब तक कि विषय अथवा संदर्भ में प्रतिकूल न दिया हो, निम्न शामिल हैःµ

(क) ( i ) किसी व्यक्ति के संदर्भ में सपिण्ड संबंध, माँ के

माध्यम से पूर्वजों की पंक्ति में तीसरी पीढ़ी तक भाग 4, खंड 1, पृष्ठ 14

(इसे सम्मिलित कर और पिता के माध्यम से

पूर्वजों की पंक्ति में पांचवी पीढ़ी (इसे सम्मिलित

कर तक फैला होता है और संबंधित व्यक्ति से, जिसे पहली पीढ़ी के रूप

माना जाता है, प्रत्येक मामले में आगे बढ़ता हुआ समझा जायेगा_

( ii ) दो व्यक्तियों को आपस में सपिण्ड कहा जाता है। जब एक व्यक्ति सपिण्ड

संबंधों की सीमा में दूसरे व्यक्ति का वंशानुगत होता है अथवा जब उनकी

एक ही वंश परम्परा होती है, जो आपस में एक-दूसरे की सपिण्ड सम्बन्ध

की सीमा में होती हैं।

(ख) निषिद्ध संबंधों की अवस्थाः दो व्यक्तियों को निषिद्ध सम्बन्धों की अवस्था में

कहा जाता है जब एक व्यक्ति दूसरे के वंश का होता है अथवा पति या पत्नी, दूसरे

व्यक्ति के आगे या पीछे के वंश का होते हैं अथवा दोनों भाई हों, चाचा-भतीजी

हो, चाची और भतीजा हों, अथवा दो भाइयों या दो बहनों की संतानें हों।

व्याख्याः उप-उपबन्ध (क) और (ख) के सदंर्भ में, सम्बन्ध में निम्नलिखित शामिल हैंःµ

( i ) आधा अथवा विपितृज रक्त सम्बन्ध और साथ ही साथ पूर्ण रक्त सम्बन्ध_

( ii ) अवैध अथवा वैध रक्त सम्बंध और साथ ही साथ सम्बन्ध_

( iii ) दत्तकगृहण का रक्त सम्बंध और साथ ही साथ सम्बन्ध_

इन उप-उपबन्धों में सम्बन्ध की और भी जो शब्दावालियां हैं उनका तद्नुसार अर्थ लगाया जायेगा।

स्पष्टीकरण

( i ) ‘ग’ एक समान पूर्वज से संबंधित है अर्थात ‘क’ के पिता की माँ के पिता

का पिता हैं तथा ‘ख’ की माँ का पिता है। चूंकि ‘क’ के पिता की पंक्ति