अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 384

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(ख) ऐसे मामलों में अथवा ऐसे क्षेत्रों में इस प्रकार की प्रविष्टियां जैसा कि नियमों

में दिया गया हो, किया जाना आवश्यक होगा।

(2) उपखंड (1) के अन्तर्गत किसी नियम को बनाते समय प्रांतीय सरकार यह प्रावधान रखेगी कि इनका उल्लंघन होने पर जुर्माना लगाया जाएगा जो कि 100 रुपये तक हो सकता है।

(11) विवाह पंजीयकः प्रांतीय सरकार हिंदू विवाहों के लिए एक या अधिक पंजीयक नियुक्त कर सकती है। पंजीयक के रूप में सन्दर्भित इस भाग में, प्रांत अथवा उसका कोई भाग के लिए वह क्षेत्र जिसमें पंजीयक नियुक्त किया गया है, उसे उसका जिला कहा जाएगा।

भाग IV , खंड 8, पृष्ठ 16

(12) पंजीयक को विवाह की सूचनाः जब इस भाग के भाग IV , खंड 9, अन्तर्गत एक पंजीकृत विवाह किए जाने का कार्य होता है तो विवाह पृष्ठ 16 करने वाले पक्ष तीसरी अनुसूची में दिये गए प्रारूप में जिले के पंजीयक को लिखित रूप में सूचना देंगे जिसमें कम से कम एक वैवाहिक पक्ष ऐसी सूचना देने से पहले उस क्षेत्र में कम से कम 30 दिन तक रहा हो।

(13) विवाह सूचना पुस्तिका और प्रकाशनः

(1) पंजीयक, खंड 12 के अन्तर्गत दी गई इस प्रकार की सभी सूचनाओं को अपने

कार्यालय के अभिलेखों में रखेगा और ऐसी प्रत्येक सूचना की एक सत्य प्रतिलिपि

राज्य सरकार द्वारा इस उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई एक पुस्तिका में प्रविष्ट करेगा

जिसे फ्हिंदू विवाह पंजीयन सूचना पुस्तिकाय् कहा जाएगा और यह पुस्तिका उचित

समय पर जांच करने के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति के लिए बिना किसी शुल्क के

उपलब्ध रहेगी।

(2) पंजीयक ऐसी सभी सूचनाओं को दिये गये विधि के अनुसार प्रकाशित करेगा।

(14) विवाह में आपत्तिः

(1) खंड 12 के अन्तर्गत किसी भावी विवाह के बारे में दी गई सूचना की तिथि से

30 दिन बीत जाने के बाद, यदि उप-खंड (2) के अंतर्गत कोई आपत्ति नहीं

आती है तो विवाह संपन्न कराया जा सकता है।

(2) किसी भावी विवाह की सूचना देने की तिथि से 30 दिन पूरा होने से पहले कोई

भी व्यक्ति इस आधार पर आपत्ति कर सकता है कि यह खंड 8 में दी गई एक

या अधिक शर्तों के प्रतिकूल है।