370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(3) दर्ज आपत्ति की प्रकृति को रजिस्ट्रार हिंदू विवाह-पंजीयन सूचना पुस्तिका में अंकित
करेगा और यदि आवश्यक हुआ तो वह आपत्ति करने वाले व्यक्ति के समक्ष
उसकी आपत्तियों को पढ़ेगा और उसे समझायेगा तथा उसके द्वारा अथवा उसकी
तरफ से वह हस्ताक्षर करेगा।
(15) आपत्ति प्राप्त होने की प्रक्रियाः
(1) यदि किसी भावी विवाह के संबंध में खंड 14 के अंतर्गत आपत्ति की जाती है
तो पंजीयक ऐसी आपत्ति प्राप्त होने के 30 दिन पूरे होने तक चाहे कोई सक्षम
न्यायालय उस समय खुला हो अथवा न खुला हो तो न्यायालय खुलने की तिथि
से जब तक 30 दिन समाप्त नहीं हो जाते तब तक किसी विवाह की अनुमति
नहीं देगा।
(2) भावी विवाह के प्रति आपत्ति करने वाला व्यक्ति स्थानीय न्यायाधिकार के अन्तर्गत
जिला न्यायालय में इस घोषणा के साथ एक मुकदमा दायर कर सकता है कि यह
विवाह खंड 8 में दिये गए एक या अधिक शर्तों के प्रतिकूल है और न्यायालय,
जिसमें यह मुकदमा दायर किया गया है, उस व्यक्ति को इस आशय का एक
प्रमाण-पत्र देता है कि इस प्रकार का एक मामला दायर हुआ है।
(3) यदि उपखंड-2 में सन्दर्भित प्रमाण-पत्र पंजीयक को आपत्ति प्राप्त होने की तिथि
से 30 दिन के अन्दर दे दिया जाता है और यदि उस समय कोई सक्षम न्यायालय
खुला है अथवा कोई ऐसा न्यायालय ने खुला हो तो ऐसे न्यायालय खुलने के 30
दिन के अन्दर, कोई भी विवाह सम्पन्न नहीं हो सकता। जब तक कि न्यायालय
कोई निर्णय नहीं देता और जब तक कि निर्णय आने के बाद अपील के लिए
नियमतः स्वीकृत समय-सीमा समाप्त नहीं हो जाती है अथवा निर्णय के विरुद्ध कोई
अपील की जाती है और जब तक कि इस संबंध में अपील किए गये न्यायालय
द्वारा कोई निर्णय नहीं दिया जाता है।
(4) यदि ऐसा प्रमाण-पत्र अनुसार विधि और उपखंड 3 में दिये गये समय-सीमा के
अन्दर नहीं दिया जाता है, अथवा यदि न्यायालय निर्णय देता है कि यह विवाह
खंड 8 में दी गईं किन्हीं भी शर्तों के प्रतिकूल नहीं है तो पंजीयक जिसको इस
विवाह की सूचना दी गई है, यह विवाह करा सकता है।
(5) यदि न्यायालय का निर्णय है कि यह विवाह खंड 8 में दी गई किन्हीं भी शर्तों
के प्रतिकूल है तो यह विवाह सम्पन्न नहीं होगा।