अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 387

372 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संपन्न हो चुका है और सभी आपैचारिकताएं जैसे विवाह के साक्षियों के हस्ताक्षर

आदि पूरी हो चुके हैं।ऽ

(20) सूचना देने के तीन महीने के भीतर विवाह न होने की स्थिति में नई सूचना की आवश्यकताः जब पंजीयक को सूचना दिए जाने के बाद तीन महीने के अन्दर विवाह संपन्न नहीं होता है, तो खंड 12 की आवश्यकताओं के अनुसार अथवा जहां होने वाले विवाह पर आपत्ति करे वाले व्यक्ति ने किसी सक्षम न्यायाधिकार वाले न्यायालय में मुकदमा दायर किया है और न्यायालय ने निर्णय दे दिया है। ऐसे निर्णयों के विरुद्ध विधितः अपील किए जाने के लिए निर्धारित तीन महीने का समय समाप्त होने पर, अथवा निर्णय के विरुद्ध अपील किये जाने पर, अपील किये गये, न्यायालय द्वारा निर्णय किये जाने के तीन महीने के अन्दर, सूचना तथा अन्य सभी प्रक्रियाएं समाप्त हुई मानी जाएंगी और कोई भी पंजीयक किसी भी विवाह के संपन्न होने की तब तक अनुमति नहीं देगा जब तक कि इस अध्याय में दी गई विधि से नई सूचना नहीं दी जाती है।

(18) विवाह संपन्न होने की विधि और स्थानः विवाह निम्नलिखित स्थानों पर संपन्न कराया जा सकता हैःµ

(1) (क) पंजीयक के कार्यालय में, अथवा

(ख) समुचित दूरी के किसी अन्य स्थान पर जहां पर दोनों पक्ष चाहते हैं और ऐसी शर्तों पर तथा तय की गई किसी निश्चित अतिरिक्त शुल्क के भुगतान पर_

(2) विवाह किसी भी विधि से संपन्न कराया जा सकता है_

भाग IV , खंड 15, पृष्ठ 17

इन सब के होते हुए भी यह पूर्ण और दोनों पक्षों पर तब तक बाध्यकारी नहीं

होगा जब तक कि प्रत्येक पक्ष पंजीयक और तीनों गवाहों की उपस्थिति में एक

दूसरे से यह नहीं कहता है कि मैं (क) तुमको (ख) विधिनुसार अपनी पत्नी/

पति स्वीकार करता हूँ।

(3) ऐसा विवाह पंजीयक और तीनों गवाहों की उपस्थिति में सम्पन्न होगा।

ऽखंड 19 के अन्तर्गत डॉ. अम्बेडकर ने अपनी व्यक्तिगत प्रति मे पेन्सिल से इस प्रकार टिप्पणी की हैःµ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि सभी औपचारिकताओं को देख लिया है। यह हमें कहीं नहीं ले जाता है। निर्णायक साक्ष्य विवाह का सम्पन्न होना है न कि औपचारिकताओं का पूरा होना।