अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 388

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(18)

(19) विवाह का प्रमाण पत्रः

(1) विवाह संपन्न हो जाने पर पंजीयक, पुस्तिका की पांचवी भाग IV , खंड 17,

अनुसूची में किये गये फार्म के अनुसार जो कि इस उद्देश्य पृष्ठ 18

के लिए रखी जाती है और जिसे हिंदू फ्पंजीकृत विवाह

प्रमाण-पत्र पुस्तिकाय् कहते हैं, प्रमाण-पत्र की प्रविष्टि करेगा और यह प्रमाण-पत्र

विवाह के दोनों पक्षों तथा तीनों साक्षियों द्वारा हस्ताक्षरित होगा।

(2) पंजीयक द्वारा हिंदू पंजीकृत विवाह प्रमाण-पत्र पुस्तिका में प्रविष्टि कर दिये जाने

के बाद, यह प्रमाण-पत्र इस तथ्य का निर्णायक प्रमाण-पत्र होगा कि पंजीयन हो

चुका सभी औपचारिकताएँ विवाह के साक्षियों के हस्ताक्षर आदि के परिप्रेक्ष्य में

पूरे हो चुके हैं।

(19)

(20) सूचना देने के तीन महीने के भीतर विवाह न होने की स्थिति में नई सूचना की आवश्यकताः जब पंजीयक को सूचना दिये जाने के बाद तीन महीने के अन्दर विवाह संपन्न नहीं होता है, खंड 12 की आवश्यकताओं के अनुसार अथवा विवाह पर आपत्ति करने वाले व्यक्ति ने किसी सक्षम न्यायाधिकार वाले न्यायालय में मुकदमा दायर किया है अैर न्यायालय ने निर्णय दे दिया है, ऐसे निर्णयों के विरुद्ध विधितः अपील किये जाने के लिए निर्धारित तीन महीने का समय समाप्त होने पर अथवा निर्णय के विरुद्ध अपील किए जाने पर, अपील किए गए न्यायालय द्वारा निर्णय किये जाने के तीन महीने के अन्दर दी गई सूचना तथा अन्य सभी प्रक्रियाएं समाप्त हुई मानी जायेंगी और कोई भी पंजीयक किसी भी विवाह को संपन्न होने की तब तक अनुमति नहीं देगा जब तक कि इस अध्याय में दिए गए विधि से नई सूचना नहीं दी जाती है।

(21)
पंजीकृत धार्मिक विवाहों का विवाहों की तरह पंजीकरण

(21) कुछ निश्चित धार्मिक विवाहों के पंजीकरण की प्रक्रियाः

(1) जब किन्हीं दो हिंदुओं ने धार्मिक विधि से विवाह किया हैः

(क) इस संहिता के लागू होने से पहले, और विवाह के समय प्रचलित परम्पराओं

या रीति-रिवाजों अथवा हिंदू कानून की व्याख्या से अथवा किन्हीं नियमों