374 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और पाठों के प्रावधानों के कारण किसी ऐसे विवाह की वैधता के संबंध
में हों_ शंका जाहिर की गई हो_ अथवा
(ख) इस संहिता के लागू होने के बाद और इस तथ्य के आधार पर कि यह खंड
7 के उपखंड ( V ) में अन्तर्विष्ट प्रावधानों के प्रतिकूल है, विवाह अवैध हो
जाता हैः
ऐसे व्यक्ति उस जिले के, पंजीयक के पास, जिसमें दोनों में से कोई एक
रहा हो, कम से कम तीस दिन शीघ्र ही अपने विवाह का पंजीकरण कराने
के लिए आवेदन इस तरह दे सकते हैं मानों पंजीयक के समक्ष उनका विवाह
एक पंजीकृत विवाह के रूप में संपन्न हो गया है।
(2) ऐसे किसी प्रार्थना-पत्र के प्राप्त होने पर, पंजीयक निर्धारित विधि से सरकारी सूचना जारी करेगा और आपत्ति आमंत्रित करने के लिए 30 दिनों का समय देने के बाद और उस अवधि में पंजीयक द्वारा आपत्तियों पर बहस सुनने के बाद, यदि वह संतुष्ट है किःµ
(क) विवाह समारोह प्रार्थना-पत्र में दी गई तिथि को ही संपन्न हुआ और दोनों
पत्नी-पत्नी के रूप में तब से ही रह रहे हों_
(ख) प्रार्थना-पत्र देने की तिथि को विवाह के दोनों पक्ष खंड 8 के उपखंड ( i ),
( ii ) और ( iv ) में दी गई शर्तों को पूरा करते हैं_ और
(ग) दोनों पक्षों में से कोई पक्ष विधवा/विधुर न ही और आवेदन देने की तिथि
पर 21 वर्ष की उम्र पूरी कर ली हो और विवाह को पंजीकृत विवाह के
रूप में पंजीकृत करने के लिए विवाह के लिए उसके संरक्षक की सहमति
प्राप्त कर ली गई हैः
ऐसी स्थिति में पंजीयक सातवीं अनुसूची में दिये तरीके से हिंदू धार्मिक
विवाह पंजीकरण में विवाह प्रमाण पत्र की प्रविष्टि करेगा और यह प्रमाण-पत्र
विवाह के पक्षों द्वारा तथा तीन साक्षियों द्वारा हस्ताक्षरित होगा।
(3) उपखंड 2 में यथा निर्दिष्ट प्रमाण-पत्र की प्रविष्टि होने के बाद यह विवाह सभी उद्देश्यों के लिए वैध माना जाएगा और इस तिथि के बाद जिस पर दोनों पक्षों ने धार्मिक विधि से विवाह किया है। जन्म लेने वाले सभी बच्चे (जिनके नाम भी प्रमाण-पत्र और हिंदू धार्मिक विवाह रजिस्टर में अंकित किये जायेंगे) हर तरह से हमेशा अपने माता-पिता के वैध संतान रहेंगे।