अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 390

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(4) विवाह का कोई भी पक्ष इस खंड के अन्तर्गत पारित किए गए यदि किसी आदेश से संतुष्ट नहीं है तो वह आदेश/आदेश के विरुद्ध खंड 3 में यथा परिभाषित जिला न्यायालय में जिसमें स्थानीय सीमा के अन्दर, पंजीयक अपना कार्य करता है, अपील कर सकता है और इस संबंध में जिला न्यायालय का निर्णय अन्तिम होगा।

(21) सांस्कारिक विवाहों के पंजीकरण की प्रक्रियाः

(1) हिंदुओं ने सांस्कारिक विधि से विवाह किया होःµ

(क) इस संहिता के लागू होने से पहले और विवाह के समय

भाग IV , खंड 18,

प्रचलित परम्पराओं या रीति-रिवाजों अथवा हिंदू कानून पृष्ठ 18

की व्याख्या से अथवा किन्हीं नियमों और किसी पाठ्य

के प्रावधानों के कारण किसी ऐसे विवाह की वैधता के संबंध में शंका

जाहिर की गई हो_ अथवा

(ख) इस संहिता के लागू होने के बाद और विवाह को इस तथ्य के आधार पर

कि यह खंड 7 के उपखंड ( V ) में अन्तर्विष्ट प्रावधानों के प्रतिकूल है,

अवैध हो जाता हैः

ऐसे व्यक्ति किसी भी समय उस जिले के पंजीयक के पास जिले में दोनों

में से कोई एक कम से कम 30 दिन रह रहा हो, शीघ्र ही अपने विवाह

का पंजीकरण कराने के लिए इस तरह आवेदन दे सकते हैं मानो पंजीयक

के समक्ष उनका विवाह एक पंजीकृत विवाह के रूप में संपन्न हुआ हो।

(2) ऐसे किसी आवेदन के प्राप्त होने पर, पंजीयक निर्धारित विधि से सरकारी सूचना जारी करेगा और आपत्ति आमंत्रित करने के लिए 30 दिनों का समय देने के बाद और उस अवधि में पंजीयक प्राप्त आपत्तियों पर बहस सुनने के बाद यदि वह संतुष्ट हैं किःµ

(क) विवाह समारोह प्रार्थना-पत्र में दी गई तिथि को संपन्न हुआ और तब से

दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं_

(ख) प्रार्थना पत्र देने की तिथि को विवाह के दोनों पक्ष खंड 10 के (1) से

(4) के उपखंडों में दी गईं शर्तों को पूरा करते हैं_ और

(ग) दोनों पक्षों में से कोई भी पक्ष विधवा/विधुर न हो और आवेदन देने के समय

21 वर्ष की उम्र पूरी कर ली हो और विवाह को पंजीकृत विवाह के रूप

में पंजीकृत करने के लिए विवाह के लिए उसके संरक्षक की सहमति प्राप्त

कर ली गई हैः