376 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ऐसी स्थिति में पंजीयक छठवीं अनुसूची में दिये गए तरीके से हिंदू सांस्कारिक
विवाह रजिस्टर में विवाह प्रमाण-पत्र की प्रविष्टि करेगा और यह प्रमाण-पत्र
विवाह के पक्षों द्वारा तथा तीन साक्षियों द्वारा हस्ताक्षरित होगा।
(3) उपखंड 2 में यथा निर्दिष्ट प्रमाण-पत्र की प्रविष्टि होने के बाद यह विवाह सभी
उद्देश्यों के लिए वैध माना जाएगा और इस तिथि के बाद, जिस पर दोनों पक्षों ने
सांस्कारिक विधि से विवाह किया है, जन्म लेने के बाद उनके सभी बच्चे (जिनके
नाम भी प्रमाण-पत्र और हिंदू सांस्कारिक विवाह रजिस्टर में अंकित किए जाएंगे)
हर तरह से अपने माता-पिता की वैध संतान होंगे।
(4) विवाह का कोई भी पक्ष इस खंड के अन्तर्गत पारित किये गए यदि किसी आदेश
से संतुष्ट नहीं है तो वह आदेश के विरुद्ध जिला न्यायालय में जिसकी स्थानीय
सीमा के अन्दर पंजीयक कार्य करता है, अपील कर सकता है और इस संबंध में
जिला न्यायालय का निर्णय अन्तिम होगा।
(22)
विवाह अभिलेखों का उपयोग
(22) निरीक्षण हेतु विवाह अभिलेखों का उपलब्ध होनाः हिंदू धार्मिक विवाह पंजीकरण और हिंदू पंजीकृत विवाह प्रमाण-पत्र पुस्तिका सभी तर्कसंगत समय पर निरीक्षण हेतु उपलब्ध रहेगी और उसमें अन्तर्विष्ट सभी कथनों की सत्यता साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगीः
आवेदन करने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने पर पंजीयक उसमें से प्रमाणित उद्हरण उसे देगा।
(23) विवाह अभिलेखों में जन्म, मृत्यु और विवाह के महा पंजीयक के पास भेजा जानाः पंजीयक राज्य के जन्म, मृत्यु और विवाह के महा पंजीयक के पास, जिस जिले में वह स्थिर है, यथा निश्चित अन्तराल में निर्धारित फार्म पर पिछले अन्तराल से लेकर अब तक हिंदू धार्मिक विवाह रजिस्टर और हिंदू पंजीयकृत विवाह प्रमाण-पत्र पुस्तिका में उसके द्वारा की गई प्रविष्टियों की स्वयं द्वारा सत्यापित एक प्रति भेजेगा।
(22) निरीक्षण हेतु विवाह अभिलेखों का उपलब्ध होनाः हिन्दू सांस्कारिक विवाह पंजी और हिन्दू पंजीकृत विवाह प्रमाण-पत्र पुस्तिका/तर्कसंगत समय पर निरीक्षण हेतु उपलब्ध रहेगी और उसमें अन्तर्विष्ट सभी कथनों की सत्यता साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगी।
भाग IV , खंड 19, पृष्ठ 18
आवेदन करने पर और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने पर पंजीयक उसमें से प्रमाणिक उद्तरण उसे देगा।