अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 392

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(23) विवाह अभिलेखों में प्रविष्टियों की प्रतियों का जन्म, मृत्यु और विवाह के महापंजीयक विषात अभिलेखों में प्रतिविष्टयों की प्रतियों का जन्म, मृत्यु और विवाह के महापंजियक के पास भेजा जानाः पंजीयक राज्य के जन्म, मृत्यु और विवाह के महापंजीयक के पास जिस जिले में वह स्थित है यथा निश्चित अन्तराल में निर्धारित फार्म पर पिछले अन्तराल से लेकर अब तक हिन्दू सांस्कारिक विवाह भाग IV , खंड रजिस्टर और हिन्दू पंजियकृत प्रमाणपत्र पुस्तिका में उसके द्वारा की 20, पृष्ठ 18 गई प्रविष्टियों की स्वयं द्वारा सत्यापित एक प्रति भेजेगा।

(24)
विवाह में संरक्षकता

(24) विवाह में संरक्षकों की प्राथमिकताः

(1) भाग IV के प्रावधानों के होते हुए भी, इस भाग के अन्तर्गत जहां भी विवाह में

संरक्षक की सहमति की आवश्यकता होती है, इस प्रकार की सहमति देने के लिए

निम्नलिखित व्यक्ति इस क्रम में अधिकृत होंगेःµ

(1) पिता, (2) माता, (3) भाई।

(4) दूर के संबंधी के बजाय के निकट संबंधी को प्राथमिकता देते हुए कोई भी अन्य

संबंधी।

व्याख्याः

(1) उपर्युक्त कॉलम 4 में दो संबंधियों में से कौन ज्यादा निकट है, यह तय करने के

लिए यह परीक्षण होगा कि भाग 7 के स्थायी सम्पत्ति का उत्तराधिकार के नियम

के अनुसार बच्चे की पुश्तैन संपत्ति का इनमें से प्रथम कौन उत्तराधिकारी है।

(2) कोई भी व्यक्ति इस खंड के प्रावधानों के अन्तर्गत संरक्षक के रूप में कार्य करने

के लिए तब तक अधिकृत नहीं होगा जब तक कि उस व्यक्ति ने स्वयं ही 21

वर्ष पूरे न कर लिए हों।

(3) कोई व्यक्ति, जो उपर्युक्त प्रावधानों के अन्तर्गत विवाह में संरक्षक बनने के लिए

अधिकृत है, अनुपस्थित रहने के कारण, असमर्थता अथवा अन्य कारणों से, अयोग्य

अथवा अस्वस्थ होने से यह कार्य करने में मना कर देता है तो क्रम में दूसरा

व्यक्ति विवाह में संरक्षक बनने के लिए अधिकृत होगा।

(4) यह भाग, संरक्षकों द्वारा आयोजित भावी विवाह को यदि न्यायालय सोचता है कि

अव्यस्कों के हित में ऐसा करना आवश्यक है, उसे अपनी निषेधाज्ञा से रोकने के