अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 393

378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

न्यायाधिकार को प्रभावी नहीं करेगा।

(24) विवाह में संरक्षकताः

(1) भाग IV के प्रावधानों के होते हुए भी, इस भाग के अन्तर्गत जहां भी विवाह में संरक्षक की सहमति की आवश्यकता होती है, इस प्रकार की सहमति देने के लिए निम्नलिखित व्यक्ति इस क्रम में अधिकृत होंगेःµ

(1) पिता,

(2) माता,

(3) दादा (पिता के पिता)।

भाग IV , खंड 22, पृष्ठ 19

(4) पूर्ण अथवा अर्द्ध रक्त संबंधी भाई, अर्द्ध रक्त संबंधी की अपेक्षा, पूर्ण रक्त संबंधी

के भाई को वरीयता दी जाती है और भाइयों में से पूर्ण अथवा अर्द्ध रक्त संबंधी

में से जो बड़ा होता है उसे वरीयता मिली हैः

यह भाग, संरक्षकों द्वारा आयोजित भावी विवाह को यदि न्यायालय सोचता हैंकि

अव्यस्कों के हित में ऐसा करना आवश्यक है, उसे अपनी निषेधाज्ञा से रोकने के

न्यायाधिकार को प्रभावी नहीं करेगा।

(5) उपर्युक्त कॉलम-चार में स्थापित प्राथमिकता के नियमों को ध्यान में रखते हुए,

पूर्ण अथवा अर्द्ध रक्त संबंधी।

(6) ममेरे दादा।

(7) उपर्युक्त कॉलम 4 में स्थापित प्राथमिकता के नियमों को ध्यान में रखते हुए

मामा।

(8) उपर्युक्त कॉलम 4 में स्थापित प्राथमिकता के नियमों को ध्यान में रखते हुए, कोई

अन्य संबंधी, दूर के रिश्ते के बजाय निकट के रिश्ते वाले को और दो संबंधियों

में से एक के ऊपर दूसरे को इसी तरह वरीयता दी जाएगी।

व्याख्याः

(1) उपर्युक्त कॉलम 8 में दो संबंधियों में से कौन ज्यादा निकटस्थ है, इसका निर्धारण

करने के लिए यह परीक्षण होगा कि भाग VII में स्थायी सम्पत्ति के उत्तराधिकार

के नियमों के अनुसार बच्चे की पुश्तैनी संपत्ति का इनमें से प्रथम कौन उत्तराधिकारी

है।