अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 394

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(2) कोई भी व्यक्ति इस खंड के प्रावधानों के अन्तर्गत संरक्षक के रूप में कार्य करने

के लिए तब तक अधिकृत नहीं होगा जब तक कि उस व्यक्ति ने स्वयं ही 21

वर्ष पूरे न कर लिये हों_

(3) यदि कोई भी व्यक्ति जो उपर्युक्त प्रावधानों के अन्तर्गत विवाह में संरक्षक बनने

के लिए अधिकृत है, अनुपस्थित रहने के कारण, असमर्थता अथवा अन्य कारणों

से, अयोग्य अथवा अस्वस्थ होने से यह कार्य करने से मना कर देता है तो क्रम

में दूसरा व्यक्ति संरक्षक बनने के लिए अधिकृत होगा।

(4) इस भाग में, यदि न्यायालय की दृष्टि में किसी, अवयस्क के हितों के लिए ऐसा

करना आवश्यक है तो निषेधाज्ञा का पालने करते हुए न्यायालय कर सकेगा। ऐसे

में आयोजित भावी विवाह के संरक्षक न्यायालय के न्यायाधिकार को प्रभावित

नहीं कर सकेंगे। संरक्षकों द्वारा आयोजित भावी विवाह को निषेधाज्ञा द्वारा रोकने

न्यायालय में क्षेत्राधिकार को कुछ भी प्रभावी नहीं होगा।

(25)
मरूमक्कटइयों आदि के बीच वैधानिक
विवाहों के लिए विशेष प्रावधान

24. A . मरूमक्कटयम अथवा आलियसंतान महिला के विवाह से संबंधित शर्तेंः

(1) इस संहिता के आरम्भ होने के बाद एक स्त्री, जो कि यदि संहिता पारित नहीं

होगी तो मरूमक्कटयम अथवा आलिय संतान विधि द्वारा अधिशासित किये जाते,

और एक हिंदू पुरुष के मध्य संपन्न हुआ विवाह वैध माना जाएगा यदि खंड 7

में दी गई शर्तें पूरी होती होंः

इसके बावजूद इस खंड के उपखंड (5) में दी गई शर्तें ऐसे किसी विवाह पर

लागू नहीं होगी।

(2) इस खंड के अन्तर्गत प्रत्येक विवाह, अपने समुदाय में प्रचलित जो दोनों अथवा

कोई एक पक्ष से संबंधित धार्मिक परम्परायें और अनुष्ठान हो, उनके अनुसार

सार्वजनिक रूप से संपन्न होगाः

इसके बाद भी कोई ऐसा विवाह मात्र इस आधार पर अवैध नहीं होगा कि उपर्युक्त

विवाह के संपन्न होने में धार्मिक परम्पराओं और अनुष्ठानों के पालन में अनियमितता

पाई गई।