अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 395

380 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(3) इस खंड के अन्तर्गत प्रत्येक विवाह की सूचना अधिकृत व्यक्ति द्वारा अधिकृत

अधिकारी को अधिकृत तरीके से और अधिकृत समय में दी जायेगी जैसा कि

नियमों में निर्धारित किया गया हो।

(4) जब इस खंड के प्रावधानों के अन्तर्गत एक स्त्री, जो यदि यह संहिता पारित नहीं

होती तो मरूमक्कटयम अथवा आलिय-संतान विधि द्वारा अधिशासित होते, और

हिंदू पुरुष, जो किसी ऐसे कानून द्वारा अधिशासित नहीं होता, का विवाह संपन्न

होता है तो दोनों पक्षों के लिए यह वैधानिक होगा कि उपखंड तीन में दी गई

सूचना के अन्तर्गत यह घोषणा करें कि वे मरूमक्कटयम अथवा आलिय-संतान

विवाहों के प्रावधानों को विलोपन करके इस भाग में अन्तर्विष्ट विशेष प्रावधानों

का पालन करना चाहते हैं। और जब तक ऐसी घोषणा नहीं की जातीःµ

(क) (इस खंड के अतिरिक्त) किसी ऐसे विशेष प्रावधान में अन्तर्विष्ट कोई भी

प्रावधान किसी भी पक्ष पर लागू नहीं होगा_ और

(ख) इस भाग के अध्याय II और III ऐसे विवाह पर अथवा विवाह के संबंध

में लागू होंगे जैसा कि किसी धार्मिक विवाह पर अथवा धार्मिक विवाह के

संबंध में लागू होते हैं।

(5) यदि कोई व्यक्ति उपखंड 3 में दी गई आवश्यकता के अनुसार विवाह की सूचना

नहीं दे पाता है तो उसे जुर्माना देना पड़ेगा जो कि पचास रुपये तक हो सकता है

इसके बाद भी, कोई विवाह ऐसी सूचना न दे पाने के कारण अवैधानिक नहीं माना

जाएगा अथवा यदि विवाह से संबंधित कोई मामला उठता है तो किसी पक्ष के

वैधिक अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा अथवा ऐसे विवाहों के मामलों का?

(26)
दण्ड इत्यादि

ऽ(25) द्विपत्नीक विवाह और उसके लिए दण्डः कोई भी व्यक्ति जो अपने पति/पत्नी के जीवन काल में, यदि ऐसे व्यक्ति का विवाह, विलोपन, ऐसे पति/पत्नी के साथ संहिता के प्रावधानों के अनुसार अथवा इस संहिता के लागू होने से पहले किसी भी समय उस वक्त की विधि, प्रचलित परम्पराओं अथवा रीति-रिवाजों से

ऽडॉ. अम्बेडकर की अपनी व्यक्तिगत प्रति में पेन्सिल से की गई टिप्पणी, ‘मामले को स्पष्ट करने के लिए मान्य परम्पराएं’ µसंपादक