अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 396

381

नहीं हुआ है, इस संहिता के लागू होने के बाद कोई दूसरे तरह का विवाह करता है, तो वह पति/पत्नी के जीवनकाल में दूसरा विवाह करने के अपराध में भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45वां अधिनियम) की धारा 494 और 495 के अन्तर्गत दण्ड का भागी है।

(27)

(26) झूठे घोषणा पत्र अथवा प्रमाण-पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दण्डः

इस भाग के अन्तर्गत किसी आवश्यक घोषणा-पत्र अथवा प्रमाण-पत्र बनाने, हस्ताक्षर करने वाला अथवा प्रमाणित करने वाला जिसमें अन्तर्विष्ट वक्तव्य झूठा हो और जिसे या तो वह जानता है अथवा झूठा मानता है अथवा सत्य नहीं मानता, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45वां अधिनियम) की धारा 199 में दिये गये अपराध का दोषी होगा।

(25)

(25) द्विपत्नीक विवाह और उसके लिए दण्डः कोई भी भाग V , खंड 24, व्यक्ति जो अपने पति/पत्नी के जीवन काल में, यदि ऐसे किसी व्यक्ति पृष्ठ 19 का विवाह ऐसे पति/पत्नी से सक्षम न्यायाधिकार वाले न्यायालय द्वारा रद्द नहीं कया गया है। इस संहिता के लागू होने के बाद कोई विवाह करता है जो वह पति/पत्नी के पूरे जीवनकाल में दूसरा विवाह करने के अपराध में भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45वां) की धारा 494 और 495 में दिये गए दण्ड का भागी होगा अपने पति अथवा पत्नी के जीवित रहते पुनः विवाह करने के अपराध में।

(26)

(25) झूठे प्रमाण-पत्रों अथवा घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करने से दण्डः इस

भाग के अन्तर्गत किसी आवश्यक घोषणा-पत्र बनाने अथवा प्रमाण -पत्र पर हस्ताक्षर करने वाला अथवा प्रमाणित करने वाला, जिसमें अन्तर्विष्ट भाग IV , खंड वक्तव्य झूठे हों जिसे या तो वह जानता है अथवा झूठा मानता है अथवा 21, पृष्ठ 18

सत्य नहीं मानता, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45वां अधिनियम)

की धारा 199 में दिये गये अपराध का दोषी होगा।