384 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लागू होने से पहले अथवा बाद में संपन्न हुआ हो, कानूनी तौर पर निष्प्रभावी हुआ नहीं माना जायेगा जब तक कि सक्षम न्यायालय ने इस संबंध में अपनी तरफ से कोई निर्णय न दिया हो।
(32)
(30क) विवाह के निष्प्रभावी होने की पद्धतिः विवाह निष्प्रभावी होने का आदेश हो जाने पर कोई विवाह निष्प्रभावी हो सकता है यदि खंड 31 में दिये गए किन्हीं कारणों से यह शून्य करार दिया जाता है, अथवा विवाह विघटन का आदेश हो जाता है, यदि खंड 32 में दिये गए किन्हीं कारणों से यह शून्य घोषित होने योग्य है अथवा खंड 33 में दिये गये किन्हीं वजहों के आधार पर तलाक का आदेश हो जाता है, जैसा भी मामला लागू हो।
विवाह का निष्प्रभावी होना
(31) विवाह के निष्प्रभावी होने के निर्णय के आधारः
(1) इस संहिता के लागू होने से पहले संपन्न हुआ कोई भी विवाह ि नष्प्रभावी होने
के आदेश से शून्य हो सकता हैःµ
(क) किसी विवाह के समय प्रचलित किन्हीं कानूनी प्रावधानों के कारण से ऐसा
विवाह इस आधार पर अवैध था कि विवाह के समय किसी पक्ष के कोई
पति अथवा पत्नी थी_ अथवा
(ख) यदि विवाह के समय कोई पक्ष खंड 5 के उपखंड (ग) में यथा परिभाषित
निषिद्ध संबंधों की सीमा में थेः
इसके बाद भी कोई विवाह इस उप-भाग के उपखंड (ख) के प्रावधानों के
अन्तर्गत निष्प्रभावी नहीं होगा यदि विवाह के समय प्रचलित कानूनी प्रावधानों
के अनुसार यह विवाह वैध रहा हो।
(2) इस संहिता के आरम्भ होने के बाद कोई भी विवाह निष्प्रभावी के आदेश के
द्वारा शून्य हो सकता हैःµ
(क) यदि धार्मिक विवाह मानते हुए भी यह खंड 7 के उपखंडों ( i ), ( ii ) और
( v ) में दी गई किसी शर्त के प्रतिकूल है।
(34) न्यायालय के आदेश के बिना किसी विवाह का न टाला जानाः इस भाग में अन्तर्विष्ट किन्हीं प्रावधानों के होते हुए भी, कोई भी विवाह चाहे इस