अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 400

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संहिता के आरम्भ होने से पहले अथवा बाद में संपन्न हुआ हो और चहो यह विवाह अमान्य हो अथवा अमान्य होने योग्य हो, कानूनी तौर पर विच्छेदित हुआ नहीं माना जाएगा जब तक कि किसी सक्षम न्यायालय ने यह घोषणा करते हुए निर्णय न दिया हो कि विवाह का विच्छेद या तो इस संबंध में दिए गए किसी अभ्यावेदन पर हुआ है अथवा किसी ऐसी कार्यवाही पर हुआ है जिसमें विवाह की वैधता पर कोई प्रश्न चिन्ह लगा हो।

इसके बाद भी, उपभाग (2) के उपखंड (क) में उद्घृत मामले पर खंड 7 के उपखंड (5) में दी गई कोई भी शर्त लागू नहीं होगी जब किसी न्यायालय में विवाह-विच्छेद का अभ्यावेदन देने से पहले खंड 21 के अन्तर्गत कोई भी विवाह रजिस्ट्री विवाह के रूप में किसी भी समय पंजीकृत हुआ हो।

(34)
विवाह का विघटन

(32) विवाह विघटन का निर्णय होने के आधारः

(1) इस संहिता के लागू होने से पूर्व संपन्न हुआ कोई भी विवाह, विघटित होने

के आदेश से इस आधार पर निष्प्रभावी हो जाएगा कि विवाह का कोई पक्ष

विवाह के समय बुद्धिहीन अथवा विक्षिप्त था।

(2) इस संहिता के लागू होने के बाद संपन्न हुआ कोई भी विवाह विघटित होने का

आदेश किए जाने से, निष्प्रभावी हो जाएगाµ

(क) यदि, इसे धार्मिक विवाह मानते हुए भी, यह खंड 7 के उपखंडों ( II ),

( III ) और ( IV ) में दी गईं किसी भी शर्त के प्रतिकूल है_

(ख) यदि, इसे पंजीयकृत विवाह के रूप में मानते हुए भी, यह खंड 8 के उपखंडों

( II ), ( III ) और ( V ) में दी गई किन्हीं शर्तों के प्रतिकूल हैः

इसके बाद भी, जब तक कि कोई जबरदस्ती अथवा धोखाधड़ी न की गई हो,

कोई भी धार्मिक विवाह, इसके पूरा होने के बाद, केवल इस आधार पर अवैध

नहीं समझा जायेगा, अथवा अवैध हुआ नहीं समझा जायेगा कि विवाह में दुल्हन

के संरक्षक की सहमति विवाह के लिए नहीं थी अथवा प्राप्त नहीं की गई

थी।