हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 40

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के सामान्य सिद्धांत और साथ ही साथ इसमें निहित मुद्दों के संबंध में ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। जहां तक सामान्य व्यवहार की बात है, कानून का नियम पूर्णतः स्पष्ट है कि जब किसी कानून या किसी व्यवहार या सामान्य सिद्धांत को आवश्यकता होती है कि किसी खास प्रक्रिया का पालन करना है। जब तक कि उस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है। तब तक यह नहीं समझा जाता कि वह वैधानिक रूप से की गई है। इस सिद्धांत के लिए मैं प्रिवी काउंसिल के प्राधिकार को उद्धृत करना चाहूँगा, जो 1936 में प्रिवी काउन्सिल की कार्रवाई के पृष्ठ 253 पर अंकित है।

माननीय उपाध्यक्षः मैं अगले कदम का भी अनुमान कर रहा हूँ। मैं मान्य सदस्य के तर्क कदम-ब-कदम ले रहा हूँ। हमें अनुमान करना चाहिये कि ऐसा ही है कि प्रवर समिति ने इस पर विचार नही किया अथवा किसी अन्य पर विचार किया। तब मान्य सदस्य प्रत्यक्षतः यह कहना चाहते हैं कि इस विषय में मेरा कोई कार्यक्षेत्र नहीं है। ऐसा है इस संबंध में मैं कहना चाहता हूँ कि इस बात पर पहले ही अध्यक्ष ने आदेश दे दिया है। मैं मान्य सदस्य को सुनना चाहूँगा यदि मुझे इस बात से संतुष्ट करने योग्य है कि वह आदेश इस बात के लिए नहीं है, जो बात वे कहना चाहते हैं। जहां तक मेरा संबंध है मैंने इस बात पर सावधानी- पूर्वक विचार किया है और मैं यह विश्वास करता हूँ कि इसमें वह बात समाविष्ट है। इसलिए मैं यह सुझाव दूंगा कि मान्य सदस्य बिना कुछ अधिक समय लिए अपना अग्रीय भाषण जारी रखें क्योंकि पहले ही हमने इस विषय पर काफी समय लगा लिया है। यहां और अन्य वक्ता भी हैं, प्रतीक्षारत हैं। मैं मान्य सदस्य से निवेदन करूँगा कि वे यथा शीघ्र इस बात को समाप्त कर दें और दूसरा विषय उठायें, यदि वे वैसा चाहते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मेरा नम्र निवेदन यह है कि सभापति के पूर्व आदेश ने इस विषय पर विचार नहीं किया था। श्री नजीरुद्दीन द्वारा उठाया गया विचार-बिन्दु केवल यह था कि इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि फिर से तैयार किये गये मसौदे पर ही विचार किया गया था। यह एक साधारण बिन्दु था। वह बिन्दु जिसे मैं निवेदन कर रहा हूँ जो खंड प्रति खंड विचारित किए जाने के संबंध में है, पर विचार-विमर्श ही नहीं किया गया। इसका परिणाम यह होगा कि यह विधेयक प्रवर समिति को भेजा जाएगा और यदि आप इस सैद्धान्तिक नियम का पालन नहीं करते तो कोई भी अन्य मंत्री इस विधेयक के बाद तैयार मसौदा रखता है तो इस पर विचार किया जाएगा। और इस प्रकार सैद्धान्तिक नियम का वास्तविक उद्देश्य_ यह है कि यह खंड प्रति

खंड विचारित किया जाए, विफल हो जाएगा। यहां इसका पर्याप्त आधार है। एक किसी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि जो कुछ भी विधेयक में हो उसमें किसी तरह का बदलाव किया जाये। इसलिए मैं आपको यह बात बताऊंगा कि कॉमन्स में किए गए अध्यक्ष का आदेश (हैन्सार्ड का पृष्ठ 301, खंड 215) यदि आप इस बारे में मुझसे सहमत हैं