386 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विवाह का शून्य होना
(29) अमान्य योग्य विवाहः
(1) इस संहिता के लागू होने से पहले संपन्न हुआ कोई भी विवाह
शून्य करने योग्य हो जायेगा यदि विवाह का कोई भी पक्ष
विवाह के समय बुद्धिहीन अथवा विक्षिप्त रहा हो।
भाग IV , खंड 5, पृष्ठ 15
(2) इस संहिता के आरम्भ होने के बाद संपन्न हुआ कोई भी विवाह शून्य होगाःµ
(क) यदि इसे सांस्कारिक विवाह मानते हुए भी, यह खंड 7 के उपखंडों ( II ),
( III ) और ( VI ) में दी गई किसी भी शर्त के प्रतिकूल हो_
(ख) यदि इसे पंजीकृत विवाह के रूप में मानते हुए भी, यह खंड 10 के उपखंडों
( II ), ( III ) और ( V ) में दी गई किन्हीं शर्तों के प्रतिकूल हैः
इसके बाद भी, जब तक कि कोई जबरदस्ती अथवा धोखाधड़ी न की गई हो,
कोई भी सांस्कारिक विवाह, इसके पूरा हो जाने के बाद, केवल इस आधार पर
अवैध नहीं समझा जायेगा कि विवाह में दुल्हन के संरक्षक की सहमति नहीं थी
अथवा सहमति प्राप्त नहीं की गई थी।
(3) इस संहिता के लागू होने से पहले या बाद में संपन्न हुआ कोई विवाह खंड 30
में दिए गए किन्हीं आधार पर शून्य करने योग्य हो जाएगा।
(4) जहां पर कोई अम्यावेदन देने के लिए इस भाग के अन्तर्गत कोई समय-सीमा
निर्धारित की गई है और इस निर्धारित सीमा में अम्यावेदन नहीं दिया गया तो यह
विवाह वैध हुआ माना जायेगा और सभी उद्देश्यों के लिए सदैव वैध रहेगा।
(36) विवाह का विघटनः
(1) खंड 35 के प्रावधानों के होते हुए भी, विवाह का कोई भी पक्ष जिला न्यायालय
में किसी भी समय किसी भी आधार पर विवाह विघटन करने का अम्यावेदन कर
सकता है जिससे कि विवाह शून्य अथा शून्य करने योग्य हो।
(2) उपखंड ( I ) में दिया गया कोई भी प्रावधान किसी भी न्यायालय को यह आदेश
देने के लिए अधिकृत नहीं करताःµ
( i ) इस संहिता के लागू होने से पहले संपन्न हुआ कोई भी विवाह जो विवाह
संपन्न होने के समय वैध रहा हो, इस आधार पर किःµ