388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
( i ) विवाह का कोई भी पक्ष विवाह के समय नपुंसक रहा हो और अभियोग की
कार्रवाई आरम्भ तक ऐसी ही स्थिति रही हो_
( ii ) पति ने किसी स्त्री को रखैल के रूप में रखा हो अथवा पत्नी किसी व्यक्ति के
रखैल हो अथवा वह वेश्या का जीवन बिता रही हो_
( iii ) विवाह के किसी पक्ष ने हिंदू धर्म से धर्मान्तरण करके कोई अन्य धर्म अपना लिया
हो_
( iv ) कोई भी पक्ष विकृत मस्तिष्क का हो और अभ्यावेदन देने से पूर्व कम से कम 5
वर्ष तक लगातार उसका इलाज चलता रहा हो_
( v ) कोई भी पक्ष भयानक असाध्य कुष्ठ रोग से पीडि़त हो।
(38) विवाह और विघटन (नया) के आधारः इस संहिता के आरम्भ होने से पूर्व अथवा पश्चात् संपन्न विवाह का एक पक्ष जिला न्यायालय में यह प्रार्थना करते हुए अभ्यावेदन दे सकता है कि उनका विवाह निम्न कारणों से विघटित कर दिया जाए इस आधार पर कि दूसरे पक्ष नेःµ
(क) न्यायिक विच्छेद का कोई आदेश पारित अथवा डिक्री होने के बाद, किसी भी पक्ष
ने लगभग दो अथवा उससे अधिक वर्षों तक पुनः वैवाहिक समागम प्रारम्भ नहीं
किया है_
(ख) प्रतिवादी वैवाहिक अधिकारों की वापसी के निर्णय का दो या अधिक वर्षों से,
पालन करने में असफल रहा है।
(35)
विवाह विच्छेद (तलाक)
(33) विवाह-विच्छेद (तलाक) की डिक्री का आधारः कोई विवाह चाहे इस संहिता के आरम्भ होने से पहले या बाद में संपन्न हुआ हो निम्नलिखित में से किसी भी आधार पर तलाक की डिक्री से निष्प्रभावी हो सकता हैःµ
( i ) विवाह का कोई भी पक्ष विवाह के समय नपुंसक हो और अभियोग की कार्रवाई
शुरू होने तक ऐसी ही स्थिति रही हो_
( ii ) पति के पास कोई रखैल हो अथवा पत्नी किसी व्यक्ति की रखैल बन गई हो
अथवा वेश्या का जीवन व्यतीत करती हो_